Saturday, March 31, 2012

झीलों की नगरी - उदयपुर


झीलों की नगरी - उदयपुर

उदयपुर रेलवे स्टेशन 

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      अनन्या एक्सप्रेस ने हमें रात को तीन बजे ही हमें उदयपुर सिटी स्टेशन पहुँचा दिया। रेलवे सुरक्षा बल के सिपाहियों ने मुझे जगाया और कहा कि क्या ट्रेन में ही सोने का इरादा है ? यह ट्रेन आगे नहीं जाती। मैंने देखा ट्रेन उदयपुरसिटी पर खड़ी हुई है, जो दो चार सवारियां ट्रेन में थीं ,पता नहीं कब चली गई। मैंने जल्दी से कल्पना को जगाया और दिलीप को भी जगा दिया था ।

     ट्रेन से उतरकर हम वेटिंग रूम में गए, वहां से नहा धोकर उदयपुर घूमने निकल पड़े, यहाँ से राजमहल करीब तीन किमी था, सुबह सुबह हम पैदल ही राजमहल की ओर निकल पड़े, थोड़ी देर में हम राजमहल के करीब थे , अभी इसके खुलने में काफी समय था इसलिए पास ही के एक पहाड़ पर स्थित किले को देखने के लिए चल पड़े। यूँ तो उदयपुर की विशेषता का वर्णन मैं क्या कर सकता हूँ, इसकी विशेषता का एहसास तो खुद ही यहाँ आकर हो ही जाता है। हम पहाड़ पर पहुंचे, यहाँ एक करणी माता का मंदिर भी है, और एक पुराने किले के अवशेष आज भी देखने को मिलते हैं, यहाँ से पूरे उदयपुर शहर का नजारा स्पष्ट दिखाई देता है।

Friday, March 30, 2012

दरगाह अजमेर शरीफ़


ख्वाज़ा गरीब नवाज के दर पर




      मैं ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर हाजिरी देने प्रत्येक साल अजमेर जाता हूँ, इन्हें अजमेर शरीफ़ भी कहा जाता है। इस साल मेरे साथ मेरी पत्नी कल्पना और मेरा मौसेरा भाई दिलीप भी था। मैंने अपनी शादी से पहले ही सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस में रिजर्वेशन करवा रखा था, इस ट्रेन का समय आगरा फोर्ट पर रात को आठ बजे है किन्तु आज यह ट्रेन रात की बजाय सुबह चार बजे आगरा फोर्ट पहुंची। आज हमारी पूरी रात इस ट्रेन के इंतजार में खराब हो गयी, खैर जैसी ख्वाजा जी की मर्जी । मैं आज पहली बार अपनी पत्नी की साथ यात्रा कर रहा था, एक अजीब सी ख़ुशी मेरे दिल में थी, मैं अपनी शादी के बाद अपनी पत्नी को भी सबसे पहले ख्वाजा जी के दर पर ले जाना चाहता था और आज मेरा यह सपना पूरा होने जा रहा था । 

Thursday, March 15, 2012

पटना की एक यात्रा

पटना की एक यात्रा

अभी हाल ही में मेरी शादी हुई थी, शादी में मेरी मौसी के लड़के महेश बहुत साथ दिया था। हम कई दिनों तक साथ भी रहे किन्तु शादी का माहौल जब शांत हुआ तो सभी रिश्तेदार विदा  अपने अपने घरों को चले गए।  कुछ दिन रुक कर महेश भी चला गया, फरवरी का महीना गुजर गया और होली की खुशियों को लेकर मार्च ने अपनी दस्तक दी, मार्च के अंत में मेरा प्लान अजमेर और उदयपुर जाने का है, अपनी शादी के बाद अपनी पहली ट्रिप मैंने उदयपुर के लिए ही फाइनल की थी। लोग तो अपनी शादी के बाद हनीमून के लिए कश्मीर, हिमाचल  या दार्जीलिंग जैसी जगह पसंद हैं किन्तु मैंने उदयपुर को ही प्राथमिकता दी। अभी मार्च के 15 दिन ही व्यतीत हुए थे कि महेश फिर से मेरे पास वापस लौटा, अपने साथ मुझे एक ट्रिप पर ले जाने के लिए।

दरअसल महेश को पटना से किसी नौकरी का ऑफर आया था, वो कभी इतना दूर नहीं गया था इसलिए मौसाजी ने मुझे उसके साथ चले जाने को कहा।  मैं उसके साथ पटना की इस यात्रा  पर जाने के लिए सहमत हो गया और हमने मथुरा पटना एक्सप्रेस में अपना कन्फर्म रिजर्वेशन करा लिया और रात को ही पटना के लिए आगरा से प्रस्थान कर दिया।   

CHANDERI PART - 3

चंदेरी - एक ऐतिहासिक शहर,  भाग - 3 यात्रा को शुरू से ज़ारी करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये ।     अब हम चंदेरी शहर से बाहर आ चुके...