Sunday, September 8, 2013

बाड़मेर की तरफ़



जोधपुर से बाड़मेर और मुनाबाब रेल यात्रा 


BADMER RAILWAY STATION


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    आज मैंने पहली बार सूर्य नगरी में कदम रखा था। मैं जोधपुर स्टेशन पर आज पहली बार आया था, यहाँ अत्यधिक भीड़ थी। कारण था बाबा रामदेव का मेला, जो जोधपुर - जैसलमेर रेलमार्ग के रामदेवरा नामक स्टेशन के पास चल रहा था। मैंने इंटरनेट के जरिये यहाँ से जैसलमेर के लिए रिज़र्वेशन करवा लिया था किन्तु वेटिंग में, अब पता करना था कि टिकट कन्फर्म हुई या नहीं। मैंने पूछताछ केंद्र पर जाकर पुछा तो पता चला कि टिकिट रद्द हो गई थी, मेरा चार्ट में नाम नहीं था।

     मैं स्टेशन के बाहर आया और यहाँ के एक ढाबे पर खाना खाया। यहाँ मैंने देखा कि सड़क पर दोनों तरफ चारपाइयाँ ही चारपाइयाँ बिछी हुई हैं बाकायदा बिस्तर लगी हुई। किराया था एक रात का मात्र 40 रुपये। परन्तु इसबार मेरा सोने का कोई इरादा न था मुझे बाड़मेर पैसेंजर पकड़नी थी जो रात 11 बजे चलकर सुबह 5 बजे बाड़मेर पहुंचा देती है। इसप्रकार मैं बाड़मेर भी पहुँच जाऊँगा और रात भी कट जाएगी। मैंने ऐसा ही किया।

    बाड़मेर पैसेंजर से मैं सुबह पांच बजे ही बाड़मेर पहुँच गया, स्टेशन पर बने वेटिंग रूम में नित्यक्रिया से फुर्सत होकर बाहर गया और एक राजस्थानी बाबा की दुकान पर दस रुपये वाली बाड़मेरी चाय पीकर आया। सुबह साढ़े सात बजे मुनाबाब लिए यहाँ से पैसेंजर जाती है, मुनाबाब जाने के लिए ट्रेन  स्टेशन पर तैयार खड़ी थी, तभी मैंने देखा कि मुनाबाब की ओर जाने वाली दूसरी लाइन के सिग्नल हरे हो रहे हैं, मतलब पैसेंजर से पहले कोई और ट्रेन  मुनाबाब की और जाने वाली थी जिसका स्टॉप बाड़मेर स्टेशन पर नहीं था, और जब ट्रेन हमारे सामने से गुजरी तो पता चला कि यह थार एक्सप्रेस थी जो कि पाकिस्तान वाले यात्रियों को लेकर मुनाबाब जा रही है ।

   थार एक्सप्रेस जोधपुर के भगत की कोठी स्टेशन से चलकर भारत देश के आखिरी स्टेशन मुनाबाब तक जाती है और मुनाबाब पर पाकिस्तान की दूसरी थार एक्सप्रेस आती है जो भारतीय थार एक्सप्रेस के यात्रियों को कराची लेकर जाती है। यह ट्रेन पूरी तरह से कवर्ड रहती है ।

     मैं अपनी पैसेंजर ट्रेन से मुनाबाब तक घूम आया, यह भारत का आखिरी रेलवे स्टेशन है इसके बाद रेलवे लाइन एल ओ सी पार करके पाकिस्तान में चली जाती है जहाँ हम नहीं जा सकते थे। यहाँ न कोई शहर था न कोई गांव, सिर्फ था तो केवल रेगिस्तान और भारतीय फ़ौज़ की चौकियां, यहाँ से पाकिस्तान महज एक किलोमीटर दूर था। मैं मुनाबाब देखकर वापस बाड़मेर आ गया और वहां से फिर जोधपुर। जोधपुर से शाम को मेरा हावड़ा एक्सप्रेस में रिजर्वेशन था दुसरे दिन मैं आगरा पहुँच गया।

जोधपुर  स्टेशन 

JODHPUR RAILWAY STATION


BADMER RAILWAY STATION

BADMER

BADMER

BHACHBHAR RAILWAY STATION

RAMSAR RLY. STATION

GAGRIYA RAILWAY STATION

GAGRIYA RAILWAY STATION

BADMER

BADMER

BADMER

BADMER

BADMER TO MUNAWAO

BADMER

BADMER

LEELMA RAILWAY STATION

BADMER

BADMER


MUNABAO RAILWAY STATION IND.

MUNABAO RAILWAY TIME TABLE

MUNABAO

MUNABAO

MUNABAO

MUNABAO RAILWAY STATION

MUNABAO

MUNABAO RLY STATION PAK

MUNABAO

MUNABAO RAILWAY STATION PAKISTAN

JAISINDER RAILWAY STATION

गडरा गांव विभाजन से पहले हिंदुस्तान की जमीन पर था, पर आज यह गांव पाकिस्तान में है और इस गांव का रेलवे स्टेशन आज भी भारत में ही है, रास्ता तो खो गया पर स्टेशन आज भी मौजूद है । और यही वो रेलवे स्टेशन जहाँ दुश्मनों ने रेलवे कर्मचारियों को मौत के  कर इस स्टेशन को आग लगा दी थी ।   

एक राजस्थानी महिला 

राजस्थान 

मुनाबाव - बाड़मेर पैसेंजर 

बाड़मेर  स्टेशन  
इस यात्रा के अन्य भाग :-



          

Saturday, September 7, 2013

अजमेर - जोधपुर पैसेंजर यात्रा



अजमेर - जोधपुर  पैसेंजर यात्रा

AJMER - JODHPUR PASSENGER


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    अजमेर से दोपहर दो बजे जोधपुर के लिए एक पैसेंजर चलती है जो मारवाड़ होते हुए शाम को जोधपुर पहुँच जाती है। इस पैसेंजर ट्रेन में रिजर्वेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। मैंने आगरा में ही इस ट्रेन में अपना रिजर्वेशन करवा लिया था। दोपहर दो बजे तक मैं अजमेर स्टेशन पर था और ट्रेन भी अपने सही समय पर स्टेशन से चलने की तैयार खड़ी हुई थी। इसी बीच रानीखेत एक्सप्रेस भी आ चुकी थी। गर मेरा इस पैसेंजर में रिजर्वेशन न होता तो शायद मैं इसी ट्रेन से जोधपुर जाता।

Friday, September 6, 2013

अजमेर दर्शन और तारागढ़ किला


अजमेर दर्शन और तारागढ़ किला 


DARGAAH AJMER SHARIF


      एक अरसा बीत चुका था बाबा से मिले, तो सोचा क्यों न उनके दर पर इस बार हाजिरी लगा दी जाय। बस फिर क्या था, खजुराहो एक्सप्रेस में आरक्षण करवाया और निकल लिए अजमेर की ओर। मैं रात में ही अजमेर पहुँच गया, और वहां से फिर दरगाह। अभी बाबा के दरबाजे खुले नहीं थे, मेरी तरह बाबा के और भी बच्चे उनसे मिलने आये हुए थे जो उनके दरबाजे खुलने का इंतज़ार कर रहे थे, इत्तफाक से आज ईद भी थी। दरगाह का नज़ारा आज देखने लायक था ।

Monday, September 2, 2013

माँ शारदा देवी के दरबार में - मैहर यात्रा


माँ शारदा देवी के दरबार में - मैहर यात्रा 

MAIHAR RAILWAY STATION


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     मैहर धाम, इलाहाबाद - जबलपुर रेलवे लाइन पर मैहर स्टेशन के समीप है। माना जाता है कि यहाँ रात को पहाड़ पर देवी के मंदिर पर कोई भी नहीं रुक सकता है, यहाँ के लोगों का मानना है यहाँ आल्हा जो कि ऊदल के भाई होने के साथ साथ एक वीर योद्धा भी थे, आज भी देवी माँ कि पूजा सबसे पहले करने आते हैं। यह शक्तिपीठ बुंदेलखंड में स्थित है और आल्हा की भक्ति को समर्पित है। यहाँ आल्हा ने अपना सर काटकर देवी माँ के चरणों में चढ़ाया था। जिस कारण मंदिर कि सीढ़ियाँ चढ़ने से पहले आल्हा कि मूर्ति के दर्शन होते हैं जो भाला लिए हाथी पर सवार हैं।

Sunday, September 1, 2013

सतना की एक शाम



सतना की एक शाम 

KC ON SATNA RAILWAY STATION



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     इलाहबाद से हमने सतना जाने का विचार बनाया, इलाहाबाद से सतना का रास्ता तीन घंटे की दूरी पर था, जहाँ मेरा छोटा मौसेरा भाई गोपाल हमारा इंतज़ार कर रहा था। वो सतना में एल एन टी इंजीनियर है और एक होटल में रहता है। मैं और केसी इलाहाबाद स्टेशन पहुँचे, यहाँ आकर देखा तो एक बहुत ही लम्बी लाइन टिकट लेने के लिए लगी हुई थी, इतनी लम्बी लाइन में मेरे लगने की तो हिम्मत ही नहीं हुई। केसी कैसे भी करके टिकट ले आये और हमने कामायनी एक्सप्रेस में अपना स्थान जमाया।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस से एक सफ़र


बुंदेलखंड एक्सप्रेस से एक सफ़र 

 
BUNDELKHAND EXPRESS ON PRAYAG JUNCTION


      मैं जब कभी किसी यात्रा पर जाता हूँ तो उसकी तैयारी महीने भर पहले से ही शुरू कर देता हूँ। अभी मैं अपनी राजस्थान यात्रा की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक किशोरी लालजी का फोन आया, बोले भाई साहब इलाहाबाद चलना है। दरअसल किशोरीलाल जी मेरे बहनोई हैँ और नोयडा में नौकरी हैं, आज से दो साल पहले रेलवे का कोई फॉर्म भरा होगा आज उसी का कॉललैटर आया है। अब अचानक से किसी यात्रा की तैयारी करना मेरे लिए कोई कठिन काम नहीं था, बस मुश्किल था तो इलाहबाद जाने वाली किसी भी ट्रेन में उपलब्ध सीट का मिलना । 

CHANDERI PART - 3

चंदेरी - एक ऐतिहासिक शहर,  भाग - 3 यात्रा को शुरू से ज़ारी करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये ।     अब हम चंदेरी शहर से बाहर आ चुके...