Tuesday, October 24, 2017

MAGADH EXPRESS : ISLAMPUR


मगध एक्सप्रेस -  इस्लामपुर से नईदिल्ली 

इस्लामपुर रेलवे स्टेशन 
इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

       राजगीर से दोपहर दो बजे दानापुर इंटरसिटी चलती है, मुझे इसी ट्रेन से वापस पटना लौटना था क्योंकि मेरा रिजर्वेशन आज शाम को मगध एक्सप्रेस में था जो शाम को साढ़े छः बजे पटना से रवाना होगी। मैं सही वक़्त पर राजगीर स्टेशन पहुँच गया और मेरे आते ही ट्रेन भी चल पड़ी, मुझे इस सफर में बस यही अफ़सोस रहा कि मैं नालंदा का विश्व विध्यालय नहीं देख पाया जिसे मोहम्मद गौरी के सेनापति बख़्तियार ख़िलजी ने नष्ट कर दिया था, परन्तु कोई बात नहीं नालंदा अभी मेरी यात्राओं की लिस्ट में शामिल रहेगा। 

     एक शानदार ऐतिहासिक धरती पर सफर करने और यहाँ के नज़ारे मुझे दुबारा यहाँ आने पर आकर्षित कर रहे थे। बख्तियारपुर पहुंचकर मुझे लगने लगा था कि कहीं मगध एक्सप्रेस छूट न जाए पर मैं गलत था पटना स्टेशन पहुँचने पर पता चला कि मगध तो अभी दिल्ली से आई है पहले ये इस्लामपुर जायेगी और वहां से वापस आयेगी तब दिल्ली की ओर जायेगी। फिर भी मैं अपनी उसी सीट पर जाकर बैठ गया जो मेरी पटना से दिल्ली तक बुक थी। 

     रात होते होते ट्रेन इस्लामपुर पहुंची, यह पटना से आगे एक छोटा और आखिरी स्टेशन है, मगध एक्सप्रेस पहले पटना तक ही चलती थी पर अत्यधिक ट्रैफिक हो जाने की वजह से रेलवे ने इसे इस्लामपुर तक कर दिया, नॉर्थन रेलवे की यह ट्रेन नईदिल्ली से आकर वापस नईदिल्ली चली जाती है। पटना से इस्लामपुर तक यह ट्रेन  लगभग पूरी खाली ही जाती है। मुझे इस सफर के दौरान इस्लामपुर तक कोई भी TTE टिकट पूछने नहीं आया। मैं फिर से राजगीर के पास ही था। इस्लामपुर से रात ग्यारह बजे ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हुई और मैं मजे से अपनी सीट पर सो गया। 

     सुबह जब आँख खुली तो देखा मैं उत्तर प्रदेश में हूँ मिर्ज़ापुर आने वाला है। मुझे लगा था मैं दोपहर तक पहुँच जाऊँगा यह ट्रेन अपने समय काफी लेट चल रही थी। शाम होते होते मैं टूंडला पहुंचा, मुझे मथुरा जाना था और यह अलीगढ होते हुए सीधे दिल्ली जाएगी, इसलिए मैं टूंडला ही उतर गया और पीछे आ रही तूफ़ान एक्सप्रेस से रात को बारह बजे मथुरा पहुंचा। स्टेशन के बारे मेरे दो भाई दिनेश और विनीत मुझे यहाँ मिले और हम तीनों ही घर की तरफ रवाना हो गए। पीछे से आते महेंद्र मामाजी अपनी बाइक पर हम तीनों को घर ले आये। 

                                   

इस्लामपुर जाते हुए सुधीर उपाध्याय 

एकंगरसराय रेलवे स्टेशन 

इस्लामपुर रेलवे स्टेशन 


इस्लामपुर रेलवे स्टेशन और सुधीर उपाध्याय 


बिहार यात्रा की अन्य यात्रायें : -

यात्रा क्र. यात्रा विवरण  यात्रा दिनाँक यात्रा विशेष 
20 अक्टूबर 2017 
बिहार का ऐतिहासिक महत्त्व 
21 अक्टूबर 2017 
आगरा कोलकाता एक्सप्रेस 
22 अक्टूबर 2017 
सासाराम में शक्तिपीठ 
22 अक्टूबर 2017 
एक महान शासक की समाधी 
22 अक्टूबर 2017 
डेहरी से रोहतास 
23 अक्टूबर 2017 
गया, पटना और राजगीर 
23 अक्टूबर 2017 
प्राचीन मगध की राजधानी 
अजातशत्रु का किला 23 अक्टूबर 2017 मगध का प्राचीन किला 
ब्रह्मकुंड - गर्म पानी का कुंड 23 अक्टूबर 2017 गंधक युक्त औषधीय जल 
10 वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 23 अक्टूबर 2017 प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन 
11 जरासंध और जरादेवी मंदिर 23 अक्टूबर 2017 महाभारत कालीन मगध सम्राट 
12 मनियार मठ 23 अक्टूबर 2017 एक बौद्ध कालीन कूप 
13 सोनभंडार या स्वर्ण भंडार गुफा 23 अक्टूबर 2017 बिम्बिसार का खजाना 
14 बिम्बिसार की जेल और जीवक का दवाखाना 23 अक्टूबर 2017 मगध के प्राचीन स्थल 
15 विश्व शांति स्तूप - राजगीर 23 अक्टूबर 2017 गिद्धकूट पर्वत पर बौद्ध स्थल  

Monday, October 23, 2017

RAJGIR STOOP


विश्व शांति स्तूप - राजगीर




इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

      जीवक का दवाखाना देखने के बाद हमारी घोड़ागाड़ी राजगीर के गिद्धकूट पर्वत की तरफ बढ़ चली।  कहा जाता है कि यही वो पर्वत है जिस पर बैठकर महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिया था। उन्ही की याद में यहाँ एक विशाल स्तूप का निर्माण कराया गया है जो राजगीर स्तूप के नाम से जाना जाता है, इसे विश्व शांति स्तूप भी कहते हैं। यह पिकनिक के लिए बेहद खूबसूरत स्थान है यहाँ स्तूप तक जाने के लिए रोपवे की व्यवस्था है यह रोपवे एक सीट का है इसलिए यह अन्य रोपवे से थोड़ा अलग और एडवेंचर लगता है। स्तूप के चारों तरफ महात्मा बुद्ध की मूर्तियां स्वर्णिम रूप में व्यवस्थित हैं। 

      ऐसे स्तूप देश में अन्य जगहों पर भी हैं। कुछ देर मैं स्तूप के आसपास ही घूमता रहा कि तभी रोपवे कंपनी का अनाउंस हुआ कि लंच का समय हो गया है रोपवे आधा एक घंटे के लिए बंद रहेगा, इसलिए जिसे जाना हो वो अभी पहुँच सकते हैं। मैं ये सुनकर सीधे रोपवे तक पहुंचा और पहाड़ से नीचे की तरफ रवाना हो गया, रास्ते में अचनाक लाइट चली गई और रोपवे सेवा कुछ समय के लिए बंद हो गई,हम पहाड़ पर तारो के सहारे हवा में लटके हुए थे करीब पंद्रह मिनट बाद जब लाइट आई और मैं नीचे पहुंचा।

नीचे पहुंचकर मैंने टाँगे वाले बाबा को जगाया और वो मुझे लेकर वापस राजगीर पहुंचे। बाबा ने मुझे जहाँ उतरा वहीँ पास में ही वेणुवन था जो की बिम्बिसार ने महात्मा के ठहरने और रहने के लिए के लिए उन्हें भेंट किया। यह काफी बड़ा पार्क है जिसमे महात्मा बुद्ध की मूर्ति दर्शनीय है, यह एक ऐतिहासिक स्थान है जहाँ महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे।


राजगीर में नाश्ता 

गिद्धकूट पर्वत पर रोपवे 

विश्व शांति स्तूप तक जाने वाली रोपवे शीट 

गिद्धकूट पर्वत पर स्तूप का प्रवेश द्वार 

विश्व शांति स्तूप - राजगीर 

यह कौन सी भाषा है - अवश्य बताना 






विश्व शांति स्तूप और सुधीर उपाध्याय 


विश्व शांति स्तूप, राजगीर 

विश्व शांति स्तूप, राजगीर 

विश्व शांति स्तूप, राजगीर 

विश्व शांति स्तूप, राजगीर 

गिद्धकूट पर्वत का एक वासी 


रोपवे टिकट काउंटर 

गिद्धकूट प्रवेश द्धार 

तांगेवाले बाबा और सुधीर उपाध्याय 

घोड़ागाड़ी, राजगीर घूमने के लिए 

वेणुवन प्रवेश द्धार 

वेणुवन, राजगीर 

वेणुवन 

वेणुवन तालाब 

वेणुवन 

वेणुवन 

वेणुवन और सुधीर उपाध्याय 

वेणुवन

विश्व शांति स्तूप, राजगीर और सुधीर उपाध्याय 
अगली यात्रा - मगध एक्सप्रेस इस्लामपुर से नईदिल्ली

इस यात्रा के अन्य भाग
यात्रा क्र. यात्रा विवरण  यात्रा दिनाँक यात्रा विशेष 
अबकी बार - बिहार 20 अक्टूबर 2017  बिहार का ऐतिहासिक महत्व 
बिहार की तरफ एक सफर 21 अक्टूबर 2017  आगरा कोलकाता एक्सप्रेस 
माँ ताराचंडी देवी शक्तिपीठ धाम 22 अक्टूबर 2017  सासाराम में शक्तिपीठ 
शेरशाह सूरी और उसका मकबरा 22 अक्टूबर 2017  एक महान शासक की समाधी 
रोहतासगढ़ की तरफ एक यात्रा 22 अक्टूबर 2017  डेहरी से रोहतास 
बुद्धपूर्णिमा एक्सप्रेस 23 अक्टूबर 2017  गया, पटना और राजगीर 
राजगीर या राजगृह - एक पर्यटन 23 अक्टूबर 2017 प्राचीन मगध की राजधानी 
अजातशत्रु का किला 23 अक्टूबर 2017 मगध का प्राचीन किला 
ब्रह्मकुंड - गर्म पानी का कुंड 23 अक्टूबर 2017 गंधक युक्त औषधीय जल 
10 वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 23 अक्टूबर 2017 प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन 
11 जरासंध और जरादेवी मंदिर 23 अक्टूबर 2017 महाभारत कालीन मगध सम्राट 
12 मनियार मठ 23 अक्टूबर 2017 एक बौद्धकालीन कूप 
13 सोनभंडार या स्वर्ण भंडार गुफा 23 अक्टूबर 2017 बिम्बिसार का ख़जाना 
14 बिम्बिसार जेल और जीवक का दवाखाना 23 अक्टूबर 2017 मगध के प्राचीन स्थल 
15 मगध एक्सप्रेस से एक सफर 23 अक्टूबर 2017 इस्लामपुर से टूंडला जंक्शन 

BIMBISAR JAIL



बिम्बिसार की जेल तथा जीवक का दवाखाना




इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

सोनभंडार से एक रास्ता जरासंध की रणभूमि की तरफ भी गया है जो यहाँ से 2 किमी की दूरी पर है। ताँगे वाले बाबा मुझे यहाँ नहीं लेकर गए और इसे बिना देखे ही मैं आगे नई मंजिल की तरफ बढ़ चला। गया मोकामा रोड पर कुछ किमी चलने के बाद बिम्बिसार की जेल आती है। कहा जाता है कि यही वो स्थान है जहाँ अजातशत्रु ने अपने पिता बिम्बिसार को कैद करके रखा था। यह स्थान स्वयं बिम्बिसार ने चयन किया था क्योंकि बिम्बिसार की महात्मा बुद्ध के प्रति विशेष आस्था थी और जहाँ यह जेल बानी थी उसके ठीक पीछे गिद्धकूट पर्वत है जिसपर महात्माबुद्ध अपने अनुयायियों के साथ निवास करते थे।

SON BHANDAR CAVE : RAJGIR



सोन भंडार या स्वर्ण भंडार गुफा 




इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें 

      मनियार मठ से आगे चलते ही रास्ता और भी रोमांचक हो गया था, बड़े बड़े वनों के बीच से गुजरते हुए अचानक एक ढलान आई, यह एक नदी थी जो इन दिनों सूखी पड़ी हुई थी, टाँगे वाले बाबा इस पर खेद प्रकट करते हुए बोले गर सरकार इस पर एक ब्रिज बना देता तो हमका काफी सहूलियत रहता। गाडी उतर जाती तो है पर चढ़ने में घोडा को काफी दिक्कत होता है। इसके बाद एक हिरन पार्क मिला जो इनदिनों बंद था, इसमें कोई भी हिरन नहीं था। अब हमारे सामने स्वर्ण भंडार गुफा थी जो राजगीर या वैभारगिरि पर्वत को काटकर बनाई गई थी।

MANIYAR MATH


मनियार मठ 





इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


      जरादेवी मंदिर आगे चलकर सोन भंडार गुफा की तरफ जाते वक़्त रास्ते में मनियार मठ पड़ता है। यूँ तो यह आज एक बौद्धिक स्थल है परन्तु इसका इतिहास आजतक स्पष्ट नहीं हो सका है। जैन धर्म के अनुसार यह विदेह ( वैशाली ) की राजकुमारी और अजातशत्रु की माँ रानी चेलन्ना का कुंआ है जो उस समय में निर्माण कूप कहलाता है। इसका निर्माण गोलाकार ईंटों से हुआ है। कुछ ग्रंथों में इसे बुद्ध का स्तूप भी कहा जाता है परन्तु यह इसे देखने के बाद सच नहीं लगता क्योंकि इसकी सरंचना एक कुएँ के प्रकार की है और वास्तव में यह एक कुँआ ही है।

JARA DEVI TEMPLE : MOTHER OF JARASANDH


जरासंध और ज़रा देवी मंदिर



यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ  क्लिक करें ।


      सप्तपर्णी गुफा देखने के बाद मैं वापस पर्वत से नीचे आया और आगे बढ़ने लगा। एक तांगे वाले बाबा से अन्य स्थलों को घुमाने के लिए 200 रूपये में राजी किया। और तांगे में बैठकर में राजगीर की अन्य प्राचीन धरोहरों को देखने के लिए निकल पड़ा, इस समय देश में हर जगह पर्यटन पर्व चल रहा था। यह मेरी ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल भ्रमण यात्रा थी। ताँगे वाले सबसे पहले ज़रा देवी के मंदिर पहुंचे और मंदिर से निकलने के बाद उन्होंने जरासंध और ज़रा देवी की कथा शुरू की।

SAPTPARNI CAVE



वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 

 इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ  क्लिक करें।

     ब्रह्मकुंड में स्नान करने के बाद मैं इसके पीछे बने पहाड़ पर चढ़ने लगा, यह राजगीर की पांच पहाड़ियों में से एक वैभारगिरि पर्वत है जिसे राजगीर पर्वत भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी पर्वत पर वह ऐतिहासिक गुफा स्थित है जहाँ अजातशत्रु के समय प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन हुआ था। इसे सप्तपर्णी गुफा कहते हैं। माना जाता है प्रथम बौद्ध संगीति महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के अगले वर्ष मगध सम्राट अजातशत्रु द्वारा राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में आहूत की गई जिसमे 500 से भी अधिक बौद्ध भिक्षुओं ने भाग लिया था तथा जिसकी अध्यक्षता महाकश्यप द्वारा की गई।

     इसी के साथ ही यहाँ जैन सम्प्रदाय के कुछ पूजनीय मंदिर भी स्थित हैं। और इनके अलावा एक महादेव का मंदिर भी इस पर्वत स्थित है। इसप्रकार यह पर्वत तीनों धर्मो के लिए विशेष महत्त्व रखता है।

Brahmakund


ब्रह्मकुंड - गर्मपानी का कुंड 



 इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
     
       अजातशत्रु के किले से थोड़ा आगे चलने पर राजगीर पर्वत दिखाई देता है, यह पर्वत गिद्धकूट पर्वत के ठीक सामने है। राजगीर पर्वत को वैभारगिरि पर्वत भी कहते हैं। राजगीर में ऐसे पांच पर्वत हैं जो जैनियों के धार्मिक स्थल हैं। महावीर स्वामी और जैनधर्म के अन्य अनुयायिओं से जुड़े यह पर्वत आज भी जैन धर्म की व्याख्या करते नजर आते हैं। राजगीर पर्वत के नीचे ही गरमपानी के कुंड हैं। इन्हे ब्रह्मकुंड कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस कुंड का अत्यधिक महत्त्व है। अभ्रक, गंधक से युक्त ब्रह्मकुंड का पानी गर्म होता है और चर्मरोग में काफी लाभदायक होता है।

Ajatshatru Fort


अजातशत्रु का किला 



इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

राजगीर रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर मैं राजगीर शहर में आया, सुबह सुबह ही पैदल अजातशत्रु के किले तक पहुंच गया । यह किला, गया - मोकामा राजमार्ग 82 पर स्थित है। यह किला पूर्ण रूप से ध्वस्त हो चुका है अब केवल इसकी बाहरी दीवारों के अवशेष ही शेष हैं, किले के अंदर जहाँ किसी ज़माने में राज महल हुआ करते थे उस जगह अब केवल वर्तमान में मैदान ही बचे हैं किसी भी राजमहल के अवशेष अब यहाँ देखने को नहीं मिलते हैं। किले के रूप में इसकी चारदीवारी ही शेष बची है जो इसके किसी समय में विशालकाय होने का संकेत देती है। 


RAJGIR


   राजगीर या राजगृह - एक पर्यटन यात्रा 



इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


      मेरी ट्रेन सुबह ही राजगीर पहुँच गई थी, जनरल कोच की ऊपर वाली सीट पर मैं सोया हुआ था, एक बिहारिन आंटी ने मुझे नींद से उठाकर बताया कि ट्रेन अपने आखिरी स्टेशन पर खड़ी है। मैं ट्रेन से नीचे उतरा तो देखा एक बहुत ही शांत और खूबसूरत जगह थी ये, सुबह सुबह राजगीर की हवा मुझे एक अलग ही एहसास दिला रही थी कि मैं रात के चकाचौंध कर देने वाले गया और पटना जैसे शहरों से अब काफी दूर आ चुका था। हर तरफ हरियाली और बड़ी बड़ी पहाड़ियाँ जिनके बीच राजगीर स्थित है। यूँ तो राजगीर का इतिहास बहुत ही शानदार रहा है, पाटलिपुत्र ( पटना ) से पूर्व मगध साम्राज्य की राजधानी गिरिबज्र या राजगृह ही थी जिसका कालान्तर में नाम राजगीर हो गया।

Buddha Poornima Express



बुद्धपूर्णिमा एक्सप्रेस - गया से पटना और राजगीर




इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।


   रोहतासगढ़ से लौटने के बाद मैं डेहरी ऑन सोन स्टेशन पर आ गया था, यहाँ से गया जाने के लिए मुझे झारखण्ड स्वर्णजयंती एक्सप्रेस मिल गई और सोन नदी पुल पार करके मैं गया पहुँच गया। गया पहुँचने तक मुझे शाम हो चुकी थी, स्टेशन पर उतरकर मुझे अनायास ही एहसास हुआ कि यह एक तीर्थ स्थान है और मुझे माँ को यहाँ लेकर आना चाहिए था। स्टेशन से बाहर निकलकर मैं बाजार पहुंचा और विष्णुपद मंदिर की तरफ रवाना हो गया। काफी चलने के बाद जब मैं थक गया तो एक हेयर सैलून में अपने बाल कटवाने पहुँच गया।

   बाल कटवाने के बाद मैं फिर से विष्णुपद मंदिर की तरफ रवाना हुआ फिर मन में सोचा कि अब रात भी हो चुकी है और पटना जाने वाली ट्रेन का समय भी होने वाला है, किसी दिन माँ के साथ ही आऊंगा तभी विष्णु जी के दर्शन भी हो जायेंगे और फल्गु नदी को भी देख लेंगे इसके अलावा बौद्ध गया का मंदिर भी देख लेंगे, अभी गया घूमने का उपयुक्त समय नहीं है इसलिए बिना दर्शन किये ही वापस स्टेशन आ गया।

Sunday, October 22, 2017

Rohtasgarh Road



                             रोहतासगढ़ की तरफ एक यात्रा 








इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

     सुबह दस बजे के करीब मैं वापस सासाराम स्टेशन आ गया, अब मुझे रोहतास के किले को देखने जाना था, रोहतास जाने के लिए डेहरी होकर जाना पड़ता है और डेहरी जाने के लिए ट्रेन ही सर्वोत्तम है जो दस मिनट में सासाराम से डेहरी पहुंचा देती है। स्टेशन पर दीक्षाभूमि एक्सप्रेस आ रही थी जो अगले स्टेशन देहरी जाने के लिए तैयार थी। कुछ ही देर बाद मैं डेहरी स्टेशन पर था। यहाँ स्टेशन के बाहर लगे बोर्ड पर रोहतास के किले को देखकर मन और भी रोमांचित हो उठा।

SHERSHAH SURI TOMB



शेरशाह सूरी और उसका मक़बरा 



इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें ।

      बिहार की ऐतिहासिक धरती पर इतिहास को खोजते हुए मैं, इतिहास के महान शासक शेरशाह सूरी तक जा पहुँचा, जिसने अपने शासन काल में भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और विशाल साम्राज्य  'मुग़ल साम्राज्य ' को छिन्न भिन्न कर दिया। बाबर द्वारा स्थापित मुग़ल साम्राज्य की जमीं नींव को उखाड़ फेंकने और दिल्ली की गद्दी पर किसी मुग़ल शासक को हटाकर खुद दिल्ली का शासक बनने और मुग़ल वंश को हटाकर सूरी वंश की स्थापना करने का श्रेय महान शासक शेरशाह सूरी को ही जाता है।

Tarachandi Devi Temple



माँ ताराचंडी देवी शक्तिपीठ धाम




 इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

           मैं रात दो बजे सासाराम स्टेशन उतर गया था, यहाँ आकर स्टेशन पर बने एक बोर्ड पर मैंने देखा कि यहाँ ताराचंडी देवी का शक्तिपीठ धाम है। सासाराम के बारे में कहा जाता है कि यह महान ऋषि परशुराम की भूमि है। सहस्रराम, सहसराम, सासाराम = परशुराम। रात को तो स्टेशन पर बने ब्रिज पर मैं सो गया परन्तु सुबह पांच बजे में उठकर देवी ताराचंडी की तरफ निकल गया। स्टेशन से इस दिव्यधाम की दूरी मात्रा पांच किमी ही है सोचा था पैदल ही नाप दूंगा।

Saturday, October 21, 2017

KOLKATA EXPRESS : SASARAM


बिहार की तरफ एक सफ़र



इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

      आज भैया दौज का त्यौहार था, अपनी बहनो से सुबह पाँच बजे ही टीका करवाकर मैं अकेला ही उस सफर पर निकल पड़ा जहाँ जाने के लिए ना जाने कब से मैं विचार बना रहा था। सुबह सुबह हलकी ठण्ड सी लगने लगी थीं। मैं पैदल ही स्टेशन पहुँच गया था। आगरा कैंट से चलकर कोलकाता जाने वाली 13168 कोलकाता एक्सप्रेस मुझे मथुरा स्टेशन पर तैयार खड़ी हुई मिली। यह ट्रेन आगरा से तो खाली आती है परन्तु मथुरा आकर यह फुल हो जाती है। अधिकतर बंगाल के लोग इस ट्रेन का उपयोग कोलकाता से मथुरा आने के लिए ही करते हैं और साथ ही मथुरा से कोलकाता जाने के लिए। खैर मैं आज बिना रिजर्वेशन था, जनरल कोच में मुझे जगह नहीं दिखी इसलिए रिजर्वेशन कोच में मैंने खड़े खड़े ही अपना सफर शुरू कर दिया।

Friday, October 20, 2017

BIHAR TRIP


अबकी बार - बिहार 


         घूमने का जज़्बा दिल में हो तो मंजिलें मिल ही जाती हैं, बस जरुरत है तो उनतक पहुँचने की। मेरे भी मन में कुछ ऐसी मंजिलें थी जहाँ तक मैं पहुंचना चाहता था। सो इस दीपावली पर ठान लिया था कि जरूर जाऊँगा अबकी बार बिहार। इस बार अकेला ही था कोई साथ में जाने वाला नहीं था इसलिए रिजर्वेशन की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। साधना को गोवर्धन पूजा वाले दिन ही बुला लिया था ताकि भाई दौज का त्यौहार मना सकूँ। दौज को सुबह पांच बजे निधि और साधना भाई दौज पूरी की और माँ का आशीर्वाद लेकर सुबह साढ़े पाँच बजे अकेला ही निकल पड़ा अपने देश के इतिहास और संस्कृति को देखने के लिए ऐतिहासिक राज्य बिहार की तरफ।

Saturday, October 14, 2017

Akber Tomb




अकबर का मक़बरा 


       यूँ तो आगरा शहर की स्थापना 1504 ईसवी में सिकंदर लोदी ने की थी। आगरा से कुछ दूर दिल्ली मार्ग पर उसने सिकंदराबाद नामक शहर बसाया था जो कालांतर में सिकंदरा ने नाम से आज भी स्थित है। परन्तु यह सिकंदरा आज सिकंदर लोदी के कारण नहीं बल्कि मुग़ल सम्राट अकबर के मकबरे के कारण विश्व भर में विख्यात है। बेशक़ आगरा शहर की स्थापना सिकंदर लोदी ने की हो मगर आगरा को पहचान अकबर के शासनकाल में ही मिली जब उसने इसे अपनी राजधानी बनाया और आगरा किला का निर्माण कराया। अकबर ने अपनी मृत्यु से पूर्व ही अपने मकबरे का भी निर्माण करा लिया था। उसकी एक पत्नी मरियम का मकबरा भी सिकंदरा के पास ही स्थित है। परन्तु मुझे खोज थी उसकी प्रिय पत्नी जोधाबाई की, अकबर के बाद वो कहाँ गई? क्या उसका भी कोई मकबरा स्थित है ? आगे जानिये। 

Thursday, October 12, 2017

RADHAKUND : A NIGHT OF AHOI ASHTAMI



 राधाकुंड मेला - अहोई अष्टमी की एक रात


       माना जाता है कि अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि को राधाकुंड में स्नान किया जाये तो एक वर्ष के अंदर संतान प्राप्ति का सुख निश्चित प्राप्त होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्य रात्रि राधाकुंड में स्नान करने का पौराणिक महत्त्व है इस दिन ब्रज की अधिष्ठात्री देवी श्री राधारानी इस कुंड में एक साथ स्नान करने वाले भक्तो को संतान प्राप्ति का फल देती हैं और साल भर के भीतर उनके यहाँ संतान जन्म लेती है। इस दिन गोवर्धन मथुरा स्थित राधाकुंड में विशाल मेला लगता है। 

     राधाकुंड का निर्माण स्वयं भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी की नोक से खोदकर किया था जब उन्होंने बछड़े का रूप लेकर आये महादैत्य अरिष्टासुर का वध किया था जिससे उन्हें गोहत्या का पाप लगा। राधारानी के कहने पर इस पाप से मुक्ति पाने के भगवान कृष्ण ने सभी तीर्थों का जल राधाकुंड में मिलकर उसमे स्नान किया और गोहत्या के पाप से मुक्ति पाई साथ ही राधारानी को यह वरदान दिया कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि जो भी इस कुंड में स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होगी। 

Saturday, October 7, 2017

Pagalbaba Temple


पागलबाबा मंदिर 



     मेरी माँ बचपन से ही हर अमावस्या को श्री ठाकुर जी के दर्शन करने आगरा से वृन्दावन जाती थीं, मथुरा से वृन्दावन जाते समय एक बहुमंजिला मंदिर पड़ता था जिसे देखकर मैं माँ से पूछता था कि माँ यह मंदिर किसका है, माँ जवाब दे देती थी पागल बाबा का। भच्पन बहुत ही चंचल होता है जानने की बड़ी  इच्छा होती थी कि  इन्हे पागलबाबा क्यों कहते हैं।  धीरे धीरे समय गुजर गया और मैं बड़ा हो गया, आज जब ठाकुरजी की कृपा से अपना आशियाना और नौकरी ब्रज में ही है तो क्विड लेकर मांट से सीधे कालिंदी के किनारे पहुँचा एक पीपों से बने हुए पल को पारकर मैं वृन्दावन पहुँचा और मथुरा रोड पर स्थित पागलबाबा के दर्शन किये।  और वहां जाकर जाना कि पागलबाबा कौन थे। गूगल पर जाकर आपको इनकी कहानी पढ़ने को मिल जाएगी। हम तो घुम्मकड़ हैं बस अपनी यात्रा का विवरण ही दे सकते हैं। 

Sunday, October 1, 2017

Dauji Temple : Baldev




दाऊजी मंदिर - बलदेव धाम 


     यूँ तो मथुरा को भगवान कृष्ण और राधा की लीलास्थली के रूप में जाना जाता है किन्तु भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र जी भी थे जो कि शेषनाग के अवतार थे। कृष्ण जी उन्हें बड़े प्यार से दाऊ भईया कह कर पुकारते थे। त्रेतायुग में भगवान् राम के छोटे भाई लक्ष्मण के रूप में शेषनाग जी ने अवतार लिया था और द्वापर युग में बलभद्र के रूप ये देवकी की सातवीं संतान थे जो संकर्षण के जरिये बसुदेव जी की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ से जन्मे थे जिस कारन इन्हे संकर्षण भगवान भी कहा जाता है। मथुरा से सादाबाद मार्ग पर 20  किमी आगे बलदेव नामक स्थान जहाँ दाऊजी का विशाल मंदिर है। यहाँ दूर दूर से काफी संख्या में लोग दाऊजी के दर्शन करने आते हैं।

Friday, September 29, 2017

Kusum Sarovar


गोवर्धन परिक्रमा एवं कुसुम सरोवर

       अभी कुछ ही दिनों पहले मेरी कंपनी का गोवर्धन क्षेत्र में एक इवेंट लगा जिसकी मुनियादी गोवेर्धन क्षेत्र के आसपास कराई जानी थी जिसकी जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई। मैंने एक टिर्री बुक की, जिसमे स्पलेंडर बाइक फिट थी और पीछे आठ दस सवारियों के बैठने की जगह थी। इस टिर्री के साथ मैंने मुनियादी करने  के लिए  गोवर्धन परिक्रमा क्षेत्र को चुना। मौसम आज सुहावना था, सुबह सुबह खूब तेज बारिश पड़ी इसलिए मौसम में काफी ठंडक भी थी। गोवर्धन का परिक्रमा मार्ग कुल 21 किमी का है जो  दो भागों में विभाजित है बड़ी परिक्रमा और छोटी परिक्रमा। बड़ी परिक्रमा कुल चार कोस की है, मतलब 12 किमी और छोटी 3 कोस की मतलब 9 किमी की।   

      गोवर्धन के मुख्य मंदिर दानघाटी से परिक्रमा शुरू होती है जो आन्यौर होती हुई राजस्थान की सीमा में प्रवेश करती है जहाँ पौराणिक पूँछरी के लौठा का मुख्य मंदिर है। यह गोवर्धन पर्वत का अंतिम स्थल है इसके बाद परिक्रमा पर्वत के दूसरी तरफ वापस दानघाटी की तरफ मुड़ जाती है जो जतीपुरा होते हुए वापस गोवर्धन जाती है। यह 12 किमी की बड़ी परिक्रमा है, यहाँ से अब छोटी परिक्रमा शुरू होती है जो गोवर्धन के बड़े बाजार से होती हुई राधाकुंड पहुंचती है। राधाकुंड से आगे कुसुम सरोवर के नाम से एक पौराणिक स्थल है जो अत्यंत ही खूबसूरत है।

    कुसुम सरोवर से सीधे हम वापस गोवर्धन पहुंचते हैं, यह परिक्रमा इन्फिनिटी के डिज़ाइन की तरह है, गोवर्धन परिक्रमा के दौरान अनेको छोटे और बड़े मंदिर पड़ते हैं जो कि दर्शनीय हैं।


गोवर्धन का एक मंदिर 

ऋणमोचन कुंड 

मानसी गंगा द्धार 

गोवर्धन 

जय गिर्राज जी महाराज 



दानघाटी मंदिर 




पूँछरी का लौठा , गोवर्धन, राजस्थान 





रूद्र कुंड 


चूतड़ टेका , एक विश्राम स्थल 

कुसुम सरोवर 

कुसुम सरोवर 

कुसुम सरोवर 

टिर्री वाला भाई 




प्राचीन कुंआ , कुसुम सरोवर 




जपाकर शर्मा , सिद्ध यात्री निवास होटल के डायरेक्टर 
  

CHANDERI PART - 3

चंदेरी - एक ऐतिहासिक शहर,  भाग - 3 यात्रा को शुरू से ज़ारी करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये ।     अब हम चंदेरी शहर से बाहर आ चुके...