Monday, September 18, 2017

SHANTANU KUND




शांतनु कुंड -  एक पौराणिक स्थल , सतोहा 


         भगवान श्री कृष्ण की ब्रजभूमि में ऐसे कई स्थान हैं जिनका सीधा सम्बन्ध या तो इतिहास से है और सर्वाधिक पुराणों से है। मैंने सभी पुराण तो नहीं पढ़े हैं परन्तु रामायण और श्रीमद भागवत का अध्ययन और श्रवण कई बार किया है, इसलिए मुझे उन स्थानों पर जाने और उन्हें देखने में विशेष रूचि है। आज ऐसे ही एक स्थान पर मैं कंपनी की गाडी क्विड से नीरज के साथ मथुरा के सतोहा ग्राम में पहुंचा जहाँ एक पौराणिक कुंड ब्रज की अनमोल धरोहर है। इस कुंड का नाम महाभारत युद्ध से पूर्व हिस्तनापुर के सम्राट महाराज शांतनु के नाम पर है। माना जाता है कि महाराज शांतनु ने इस स्थान पर रहकर तपस्या की थी।



        महाराज शांतनु, महाभारत के वीर योद्धा भीष्म पितामह के पिता थे। गंगा के चले जाने के बाद शांतनु ने सत्यवती से विवाह कर लिया, यह विवाह इस शर्त पर हुआ था कि सत्यवती के जो पुत्र उत्पन्न होगा वही हिस्तनापुर का उत्तराधिकारी होगा, भीष्म नहीं। इसलिए भीष्म ने पिता के प्रेम को देखते हुए कठोर प्रतिज्ञा की, कि वह आजीवन अविवाहित रहेंगे। इसी प्रतिज्ञा के कारण उन्हें भीष्म कहा जाने लगा, इससे पहले उनका नाम देवव्रत था।

        मैं और नीरज सतोहा ग्राम किसी काम से गए थे, काम होने के बाद हम शांतनु कुंड पहुंचे। एक ऊँचे टीले के चारों ताराम एक गहरी खाई के रूप में यह कुंड आज भी व्यवस्थित है। ब्रज फाउंडेशन द्वारा इसका विकास कराया गया और इसके किनारे पक्के घाटों का निर्माण कराया गया। हालाँकि घाट तो काफी सुन्दर और पक्के बने हुए में परन्तु इस कुंड का पानी खराब है, पानी का निकास न होने के कारण इसमें हरी काई जमी हुई है और बदबू का कारन बनी हुई है।

     गर्मी के कारण बन्दर इस कुंड में बड़े आनंद से नहा रहे थे। कुंड के ऊपर एक पुल बना हुआ है जो टीले पर स्थित शांतनु बिहारी जी के मंदिर के लिए गया है , हम भी मंदिर पहुंचे परन्तु कपाट बंद होने के कारण दर्शन न कर सके। इस कुंड के ठीक सामने ऐतिहासिक कालीन सराये बनी हुई हैं, जो मुग़ल शैली में निर्मित हैं, इससे साबित होता है कि यह तीर्थ यात्रियों के ठहरने और विश्राम के लिए किसी मुग़ल शासक ने ही बनाये होंगे। 


शांतनु कुंड 

मुगलकालीन सराय 




ब्रजधाम 

शांतनु बिहारी मंदिर 

शांतनु कुंड 





नीरज 

शांतनु बिहारी मंदिर 







2 comments:

  1. अनछुई जगह, यह भी नहीं देखी,
    इस बार यह भी पक्की

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  2. सतोहा गाव का शांतनु कुंड....वाह न कभी सुना है और न कभी देखा....बिल्कुल नई जगह दिखाने के लिए धन्यवाद...

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