Saturday, January 11, 2020

Amarkantak


अमरकंटक की एक सैर 



अमरकंटक :-  मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों की सीमा तथा मैकाल पर्वत श्रृंखला पर स्थित प्राकृतिक वातावरण से भरपूर भगवान शिव और उनकी पुत्री श्री नर्मदा देवी जी का दिव्यधाम है। यहीं से श्री नर्मदा नदी का उद्गम हुआ है और साथ ही सोन तथा जाह्नवी नदी का भी यह उद्गम स्थल है। प्राकृतिक वातावरण से भरपूर और एक पर्वतीय स्थल होने के कारण यह स्थान प्राचीनकाल से ही साधू संतो तथा ऋषि मुनियों केलिए साधना एवं तप करने योग्य उचित स्थान है और आज भी यहाँ अनेकों ऋषि मुनि अपनी तप और साधना में लग्न रहते हैं। यहाँ अनेकों आश्रम स्थित हैं जिनमें अच्छी सुविधा के साथ ठहरने की उचित व्यवस्था है। कुल मिलकर अमरकंटक एक दिव्य और पुण्य धाम तथा हिन्दुओं का धार्मिक केंद्र है।

अमरकंटक में दर्शनीय स्थल :- हालांकि समस्त अमरकंटक धाम दर्शनीय है किन्तु यहाँ अनेकों प्राचीन स्थान ऐसे हैं जिन्हें देखने के लिए दूर दूर से अनेकों तीर्थयात्री प्रतिदिन यहाँ आते हैं और कुछदिन यहाँ रहकर अपनी प्रतिदिन के व्यस्त जीवन और भागदौड़ से थोड़ा आराम पाते हैं। यहाँ के दर्शनीय स्थल निम्न प्रकार हैं -

  • श्री नर्मदा जी का मंदिर तथा उद्गम स्थल 
  • कल्चुरी काल के ऐतिहासिक मंदिर जिनमे सबसे प्रमुख कर्ण मंदिर है। 
  • माई की बगिया 
  • माई का मंडप 
  • सोनमुड़ा  ( सोन नदी का उद्गम स्थल )
  • श्री यंत्र महामेरु मंदिर 
  • श्री मार्कण्डेय आश्रम 
  • श्री गायत्री मंदिर 
  • कपिल धारा 
  • दूध धारा 
  • श्री आदिनाथ जैन मंदिर 
  • श्री जालेश्वर मंदिर 
  • कबीर चबूतरा 
  • मैकाल पार्क 
अमरकंटक कैसे पहुंचे :- अमरकंटक धाम मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मैकाल पर्वत पर छत्तीसगढ़ की सीमारेखा पर स्थित है। यहाँ ट्रेन द्वारा पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पेण्ड्रा रोड है जो कटनी से बिलासपुर रेलमार्ग पर स्थित है। स्टेशन के बाहर से ही अमरकंटक जाने के लिए टैक्सियां उपलब्ध रहती हैं जो 80 रूपये पर व्यक्ति के हिसाब से किराया लेती हैं। नजदकी एयरपोर्ट बिलासपुर में स्थित है। 


 यात्रा दिनाँक - 21 जुलाई 2019 , सहयात्री - आचार्य श्री विष्णु भारद्वाज


  •  मथुरा से पेंड्रा रोड 

     अमरकंटक जाने का प्लान मैंने और त्रिपाठी जी ने कालिंजर यात्रा के दौरान बनाया था, परन्तु मेरी इस यात्रा के सहयात्री बने आचार्य श्री विष्णु शरण भारद्वाज, जिनके साथ हाल ही में मैंने केदारनाथ यात्रा पूर्ण की थी। जुलाई माह के इस मानसून के मौसम में हमने अपना रिजर्वेशन उत्कल कलिंग एक्सप्रेस में मथुरा से पेंड्रा रोड के लिए कराया जो कि कन्फर्म मिला। यात्रा की तारीख के दिन विष्णु भाई मथुरा स्टेशन पहुँच गए और जबकि मैं अपनी ऑफिस में ही था। उसदिन उसदिन उत्कल एक्सप्रेस लेट आई, विष्णु भाई मथुरा से जब ट्रेन में बैठ लिए तो मैं भी अपनी ऑफिस के नजदीक स्थित बाद स्टेशन पहुँच गया। 

    यहाँ मुझे मेरी ऑफिस में काम करने वाला लड़का पोप सिंह मिला जो की ऑफिस ख़त्म करके अपने घर जाने के लिए शटल का इंतज़ार कर रहा था। मथुरा से अगला स्टेशन बाद पड़ता है जहाँ कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों के टेक्निकल हाल्ट स्टॉप है। यहाँ से कहीं भी जाने के लिए किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन का टिकिट नहीं मिलता है। मेरा तो रिजर्वेशन था परन्तु मथुरा से और मैंने अपना बोर्डिंग स्टेशन चुना बाद को। में मैंने इसे शुरू से ही एक एडवेंचर यात्रा बनाया। कुछ ही समय में उत्कल एक्सप्रेस बाद पहुँची और मैं ट्रेन में विष्णु भाई से मिला। यह मेरी और विष्णु भाई की एकसाथ दूसरी यात्रा थी।

     आगरा निकलने के बाद हम अपनी अपनी सीट पर लेट गए और जब सुबह आँख खुली तो देखा ट्रेन अभी कटनी मुरवाड़ा स्टेशन पर ही खड़ी थी। विष्णु भाई बिना स्नान के चाय या नाश्ता नहीं करते हैं और मैं  इन सारे नियमों से मुक्त हूँ इसलिए मैंने चाय और पोहा का नाश्ता ट्रेन में ही किया और कुछ समय बाद हम अपनी यात्रा के आखिरी स्टॉप पेंड्रा रोड स्टेशन पर उतरे। यहाँ स्टेशन पर एक बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था, अमरकंटक के लिए यहाँ उतरिये। स्टेशन के बाहर ही अनेकों टेक्सियाँ और अन्य प्राइवेट वाहन अमरकंटक जाने के लिए खड़े रहते हैं। हम भी एक बोलेरों में अमरकंटक के लिए रवाना हो गए। स्टेशन से अमरकंटक का मार्ग बहुत ही मनोरम और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर है। हरे भरे वन और पहाड़ी घुमावदार रास्ते इसके सौंदर्य को और भी शानदार बना देते हैं।

स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार करते हुए उपाध्याय जी 

बाद स्टेशन पर मैं और पोप सिंह 

एक फोटू उत्कल एक्सप्रेस के साथ 
बीरसिंहपुर रेलवे स्टेशन 

पेंड्रा रोड पर अमरकंटक के लिए उतरिये। 
  • अमरकंटक में गुरुद्वारा 

    करीब १ घंटे यात्रा करने के बाद हम अमरकंटक के नर्मदा मंदिर पर पहुँच गए, परन्तु मंदिर में दर्शन करने से पूर्व स्नान करना आवश्यक था, अतः यहाँ बह रहीं पतित पावन नर्मदा जी में हमने स्नान किया और उसके बाद अपने ठहरने के लिए हम उपयुक्त स्थान की खोज में निकल गए। आख़िरकार हम अमरकंटक में एकमात्र स्थित गुरूद्वारे में पहुंचे जहाँ हमें ठहरने के लिए एक कमरा मिल गया। गुरुद्वारा का प्रांगण भी काफी हरा भरा था यहाँ कटहल के वृक्ष भी दर्शनीय थे। 

    कहते हैं गुरुद्वारा जहाँ भी होता है लंगर भवन भी अवश्य वहां होता है। हमने गुरद्वारा के संचालक सरदारजी से लंगर के बारे पूछा तो उन्होंने स्पष्ट रू से हमसे लंगर के लिए मना कर दिया। यहाँ बात मुफ्त भोजन की नहीं थी, बल्कि मेरे सहयात्री आचार्य विष्णुजी होटल में भोजन नहीं करते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि गुरूद्वारे में उन्हें शुद्ध व् शाकाहारी मिल ही जायेगा परन्तु ऐसा ना हो सका और हम अपने बैग एवं अन्य आवश्यक सामान यहाँ छोड़कर और कैमरे को गले में टाँग कर नर्मदा मंदिर जी की तरफ रवाना हो गए। 

गुरुद्वारा, अमरकंटक 

गुरुद्वारा, अमरकंटक 


गुरुद्वारा, अमरकंटक 
गुरुद्वारा, अमरकंटक 

  • श्री नर्मदा मंदिर - उद्गम स्थल एवं कुंड 
     गुरूद्वारे से नर्मदा मंदिर की दूरी लगभग 1 किमी आसपास है, मैं और विष्णु भाई सबसे पहले रेंट पर मिलने वाली बाइक की तलाश में बस स्टैंड तक पहुंचे परन्तु यहाँ हमें कहीं भी किराये पर मिलने वाली बाइक नहीं मिली। मुझे भूख भी लगी थी अतः यहाँ बने एक होटल में मैंने भोजन किया और विष्णु भाई ने एक पराठा खाकर ही अपनी भूख को आराम दिया। इसके बाद हम लोग पैदल ही नर्मदा मंदिर की तरफ रवाना हो गए।

    पुराणों के अनुसार श्री नर्मदा जी भगवान शिव की पुत्री माना गया है। मैकाल पर्वत पर स्थित अमरकंटक धाम से ही नर्मदा जी का उद्गम हुआ है और जिस स्थान पर श्री नर्मदा जी का उद्गम स्थल है वहां एक विशाल प्रांगण में श्री नर्मदा जी का भव्य मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया, यह आज भी अज्ञात है परन्तु जनश्रुतियों के अनुसार यहाँ बनी रेवा नायक की मूर्ति से यह प्रमाणित होता है कि मंदिर का निर्माण रेवा नायक ने ही कराया होगा और बाद में कलचुरी वंश के शासकों ने यहाँ समय समय पर जीर्णोद्धार कराये होंगे।

   श्री नर्मदा जी के अलावा यहाँ अन्य मंदिर भी बने हैं जिनमें सबसे प्रमुख भगवान शिव का अमरेश्वर मंदिर है  जिनके नाम पर ही इस स्थान का नाम अमरकंटक पड़ा।

अमरकंटक बस स्टैंड 


अमरकंटक में भोजन 

श्री नर्मदा मंदिर प्रवेश द्वार 

श्री नर्मदा मंदिर, अमरकंटक 

रुद्राक्ष वृक्ष के नीचे बैठे आचार्य श्री विष्णु शरण भारद्वाज 
श्री नर्मदा मंदिर में सुधीर उपाध्याय 

श्री नर्मदा जी का उद्गम स्थल 

नर्मदा मंदिर प्रांगण एवं कुंड 

हर हर नर्मदे 

रेवा नायक 

नर्मदा मंदिर प्रांगण 

श्री नर्मदा देवी मंदिर, अमरकंटक 



  • ऐतिहासिक मंदिर एवं कर्ण मंदिर ( कल्चुरी कालीन )
      नर्मदा मंदिर के ठीक पीछे प्राचीन मंदिरों की एक श्रृंखला दिखाई देती है, यह सभी ऐतिहासिक कल्चुरी कालीन मंदिर हैं जो अब भारतीय पुरातत्व विभाग के सर्वेक्षण में हैं। इन मंदिरों को देखने के लिए सर्वप्रथम प्रवेश द्वार पर टिकट लेनी होती है। हम भी टिकट लेकर इन मंदिरों की श्रंखलाओं को देखने के लिए गए। 

     ऐतिहासिक स्त्रोतों से ज्ञात होता है कि इन सभी मंदिरों का निर्माण नौवीं और दशवीं शताब्दी के मध्य कल्चुरी शासकों द्वारा कराया गया था। इन मंदिरों में मुख्यतः श्री विष्णु मंदिर, मच्छेंद्रनाथ मंदिर, श्री पातालेश्वर महादेव और सबसे मुख्य कर्ण मंदिर है। कर्ण मंदिर 3 गर्भ गृह वाला भगवान शिव को समर्पित मंदिर है जिसका निर्माण दशवीं शताब्दी के अंत में राजा कर्ण ने करवाया था अतः इसीकारण इसे कर्ण मंदिर कहते हैं।  

प्रवेश द्वार 





ऐतिहासिक स्थलों पर मोहब्बतें अवश्य मिल जाती हैं। 

 प्राचीन मंदिर समूह,  




विष्णु भाई का एक शानदार फोटू  



मोहब्बतों की निशानियाँ 

गुड़हल का फूल 

प्राचीन मंदिर समूह और विष्णु भाई 

एक ऐतिहासिक कुआँ 


रंग महला , अमरकंटक 

श्री विष्णु मंदिर, अमरकण्टक 

श्री पातालेश्वर महादेव मंदिर,  



कर्ण मंदिर 

कर्ण मंदिर, अमरकंटक 
  • श्री महामेरु यन्त्र मंदिर 
    कल्चुरी कालीन मंदिर देखने के बाद मैं और विष्णु भाई यहाँ से दूर दिख रहे यन्त्र मंदिर की तरफ बढ़ चले। यह रास्ता सीधे सोनमुड़ा  की तरफ जाता है जो कि सोन नदी का उद्गम स्थल है। जब हम यन्त्र मंदिर पहुंचे तो देखा यह अभी बंद था और इसके निर्माण का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ था। यह विश्व का सर्वप्रथम श्री विद्या तंत्र मार्ग से ज्ञान देने वाला मंदिर है। जब हम इस मंदिर के फोटू खींच रहे थे तो हमारे साथ साथ एक बाबा भी इस मंदिर के अंदर घुसने का मार्ग तलाश रहे थे। और आखिरकार बाबा को मार्ग मिल ही गया। 

    मैं और विष्णु भाई भी बाबा के पीछे पीछे मंदिर में घुस गए लेकिन मंदिर का निर्माण करा रहे गुरूजी की नजर जब हम तीनों पर पड़ी और जब उन्होंने हमें वहीँ रुकने को कहा तो हम तीनों बिना देर किये उसी मार्ग से वापस लौट लिए। जल्दी जल्दी में लौटते हुए विष्णुभाई जी की चप्पल यहाँ टूट गई और हम तीनों सोनमुड़ा मार्ग पर आकर बैठ गए। मंदिर का अनुभव अच्छा रहा परन्तु बिना अनुमति ही सही हमने श्रीयन्त्र मंदिर  को अंदर घुसकर देख लिया था।

सोनमुड़ा की तरफ 

श्री यन्त्र मंदिर की पहली झलक  

श्री यंत्र मंदिर, अमरकंटक 

श्री यंत्र महामेरू मंदिर, अमरकंटक 

अमरकंटक 

हमें इस मंदिर को अभी और देखना था, बाबा यही कह रहे हैं 

श्री यंत्र मंदिर का अंदर का दृश्य 

त्रिदेवियाँ 

श्री महामेरु यन्त्र मंदिर, अमरकंटक 

यन्त्र मंदिर से लौटने के बाद 
  • सोनमुड़ा - सोन नदी का उद्गम स्थल 
श्री यन्त्र मंदिर से थोड़ा आगे हरे भरे वनों के बीच से रास्ता सोनमुडा तक पहुँचता है। यह मैकाल पर्वत का पूर्वी सिरा है। यहाँ सोन और भद्र का उद्गम स्थल जहाँ दोनों का संगम भी होता है और यहीं से सोन नदी सोनभद्र के नाम से 300 फ़ीट ऊंचाई से नीचे धरती पर गिरती है और भू गर्भ में समाहित हो जाती है और इसके बाद यहाँ से 60 किमी दूर पूर्व में सोनबचरबार नामक स्थान पर निकलती है। यह स्थान प्राकृतिक वातावरण से भरपूर स्थान है। यहाँ आकर मन को असीम शान्ति का अनुभव होता है। यहाँ ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सोन तथा वीरभद्र का उद्गम स्थल है, साथ ही यहाँ सोनाक्षी देवी शक्तिपीठ के भी शानदार दर्शन होते हैं। 


सोनमुड़ा की तरफ 

सोनमुड़ा, अमरकंटक 


सोनमुड़ा मंदिर श्रृंखला 



बजरंग बली 

वीरभद्र 

भद्रसेन 

सोन नदी का उद्गम स्थल 



भद्रसेन  का उद्गम  स्थल 

श्री भद्रसेन 

सोनभद्र संगम 



सोनमुड़ा में हमको शाम हो गई और अमरकंटक धाम रात के अंधकार में समाहित हो गया। हम दोनों रात के अँधेरे में पैदल ही घने वनों के बीच गुरूद्वारे की तरफ लौटने लगे। दिन में यह रास्ता जितना सुहावना और खूबसूरत लगता है वहीँ रात में यह अब उतना ही भयानक हो चला था। जंगली जानवरों की आवाजें और रास्ते का सूनापन हमें अंदर ही अंदर डरा रहा था किन्तु एक से भले दो होते ही हैं अतः हम आपस में बात करते हुए कब गुरूद्वारे पहुँच गए पता ही नहीं चला।

दूसरा दिन - दिनाँक  21 जुलाई 2019 


दुसरे दिन सुबह जल्दी उठकर हमने अपने साथ एक छोटा बैग लिया और उसमे आज के लिए बदलने वाले कपडे रखे। आज हमने कपिलधारा जाना था जो यहाँ से छः या सात किमी दूर है। गुरूद्वारे से बाहर आकर मैंने  चाय नाश्ता किया और हम अपने आगे के सफर पर रवाना हो लिए।
कटहल का पेड़ 

गुरूद्वारे में स्थान 

सुबह का नाश्ता 




  • कपिलधारा 
    श्री नर्मदा मंदिर से 6 किमी दूर  पश्चिम दिशा में नर्मदा नदी का प्रथम जलप्रपात है जहाँ नर्मदा नदी 100 फ़ीट की ऊँचाई से प्रचंड वेग से नीचे गिरती है। प्राचीन काल में यहाँ कपिल मुनि का आश्रम था जिसकारण इस स्थान को कपिलधारा के नाम से जाना जाता है। यह स्थान भी प्राकृतिक वातावरण से भरपुर स्थान है। यहाँ नर्मदा से एक छोटी रेखा में बहती हुई दिखाई देती हैं जिसे आसानी से पार किया जा सकता है। नदी के दूसरी तरफ जाने पर कपिल मुनि का प्राचीन मंदिर है और मंदिर से कुछ नीचे जाने पर कपिलधारा नामक जलप्रपात के दर्शन होते हैं। 

    यहाँ बड़ी बड़ी चट्टानें हैं जिनपर नर्मदा जी का जल प्रचंड वेग से गिरता हुआ दिखाई देता है। यहाँ स्नान करना कठिन और खतरनाक है अतः अधिकांशतः लोग यहाँ कुछ दूर स्थीय नर्मदा जी के दुसरे जलप्रपात जिसे दूध धारा के नाम से जाना जाता है वहां जाकर स्नान करते हैं। परन्तु मैंने और विष्णु भाई ने कपिलधारा में ही स्नान किया और गुरूद्वारे के कमरे की छबि यहीं छोड़ दी।  जब ऊपर पहुँचने के बाद हमें दुबारा चाबी का ध्यान आया तो मैं उसे ढूंढते हुए यहाँ आया और मुझे चाबी यहीं मिल गई।  


कपिलधारा स्थान 


कपिलधारा के रास्ते में 

नजदीक बहती नर्मदा नदी 



नर्मदा नदी का पहला गिराव 

हर हर नर्मदे,  नर्मदा नदी 

नर्मदा नदी पर बना एक पुल 


कपिल  मुनि आश्रम 


कपिलेश्वर महादेव मंदिर 

महर्षि कपिल 

कपिल मुनि को सादर प्रणाम 


आश्रम में अखंड धुनि 

अमरकंटक वासी 

जलप्रपात की तरफ जाती सीढ़ियां 

एक पड़ाव, यह जंक्शन पॉइंट है यहाँ से एक रास्ता कपिलधारा के लिए तथा दूसरा रास्ता दूधधारा के लिए जाता है। 

कपिलधारा जलप्रपात के प्रथम दर्शन 

कपिलधारा जलप्रपात 


जलप्रपात के नीचे स्नान करते आचार्य जी 

और मैं भी 


नर्मदा नदी 

  • दूधधारा 
कपिलधारा से थोड़ा आगे जाने पर नर्मदा जी का दूसरा जलप्रपात है जिसे दूधधारा कहते हैं। यहाँ नर्मदा जी 10 फ़ीट के ऊंचाई से नीचे गिरती हैं। नीचे गिरते समय नर्मदा नदी का जल दूध के सामान श्वेत प्रतीत होता है इसीकारण इसे दूधधारा कहा जाता है। यहाँ पहाड़ के अंदर एक गुफा है जिसमे नर्मदा जी की मूर्ति स्थापित है। कहते हैं प्राचीन काल में यहाँ दुर्वासा ऋषि का आश्रम था अतः यहाँ दुर्वासा ऋषि के भी दर्शन प्राप्त होते हैं। कुल मिलकर यह स्थान भी हरे भरे वनों के बीच एक भरपूर प्राकृतिक स्थान है। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान स्वर्ग से कम सुन्दर नहीं है।  


जंक्शन पॉइंट पर आचार्य जी स्नान के पश्चात 

जंक्शन पॉइंट पर एक दुकान 

मार्गदर्शन 

नर्मदा नदी के साथ साथ चले आ रहे आचार्य जी 

श्री नर्मदा नदी 


नर्मदा नदी 

दूधधारा जलप्रपात 



प्राचीन गुफा 




श्री नर्मदा जी 

दुर्वासा ऋषि को सादर प्रणाम 



जंक्शन पॉइंट से कपिलमुनि आश्रम की तरफ जाती सीढ़ियां 
  • माई की बगिया 

    हम वापस कपिलधारा के वाहन स्टैंड पर पहुंचे। यहाँ से एक ऑटो किराये पर लेकर हमने पुनः अमरकंटक के प्रमुख स्थानों का भ्रमण किया जिनमे सबसे पहले श्री नर्मदा मंदिर के साथ साथ भगवान् भोलेनाथ के शिवलिंग के दर्शन किये। इसके बाद हम माई की बगिया नामक स्थान पर पहुंचे।

    श्री नर्मदा मंदिर से पूर्व दिशा में 1 किमी की दूरी पर माई की बगिया नामक मनोरम स्थान है जिसे चरणोदक कुंड के नाम से भी जाना जाता है। यह माँ नर्मदा का क्रीड़ास्थल है। कहते हैं बाल्यकाल में माँ नर्मदा इस स्थान पर अपनी सहेली गुलबकावली के साथ क्रीड़ा किया करती थीं। आज गुलबकावलि को एक पौधे के रूप में माना जाता है जो माई की बगिया में अधिक मात्रा में देखने को मिलते हैं।

   माई के बगिया से पूर्व दिशा में एक किमी दूर सोनमुड़ा स्थित है, हम एकबार फिर सोनमुड़ा में थे। यह स्थान ही कुछ ऐसा हैं जहाँ से वापस लौटने को किसी का भी मन नहीं करेगा। कहा जाता है कि सोन और नर्मदा के विवाह में विघ्न पड़ने के कारण दोनों में दूरियां बढ़ गईं और दोनों की दिशाएँ भी अलग अलग हो गईं। नर्मदा नदी जहाँ पश्चिम दिशा में बहकर सीधे समुद्र में जा मिलती है वहीँ सोन नदी पूर्व दिशा में बहकर एक विकराल नदी का रूप धारण कर लेती है और अंत में पटना के समीप गंगा में जा मिलती है।


कपिल धारा स्टैंड 

अमरकंटक 

दूर से दिखता अमरकंटक 

सावित्री तालाब 



माई की बगिया 


श्री नर्मदा मंदिर 

माई की बगिया 

सोनमुड़ा की तरफ 




सोनमुड़ा से दीखता एक दृश्य 




सोन नदी का प्रथम गिराव 

सोनमुड़ा सनराइज व्यू पॉइंट 

सोनमुड़ा 

सोन नदी 



  • मार्कण्डेय आश्रम 

सोनमुडा से आगे हमें मार्कण्डेय ऋषि की तपस्थली भी देखने को मिली। यहाँ एक बहुत ही शानदार मंदिर बना हुआ है जिसमें नवग्रह सहित समस्त हिन्दू देवताओं के मंदिर स्थित हैं।



श्री मार्कण्डेय आश्रम 

मार्कण्डेय मंदिर, अमरकंटक 

श्री मार्कण्डेय ऋषि मंदिर 


साधना में लीं आचार्य जी 






  • मैकाल पार्क 
मध्य प्रदेश सरकार ने यहाँ बच्चों के मनोरंजन हेतु नर्मदा नदी के किनारे एक खूबसूरत पार्क का निर्माण किया है जिसका नाम इस पर्वत के नाम पर मैकाल पार्क रखा है। यहाँ बच्चों के मनोरंजन हेतु अनेकों झूले लगे हुए हैं तथा बड़ों के लिए यहाँ बोटिंग सुविधा भी उपलब्ध है। 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 

मैकाल पार्क 


मैकाल पार्क 
  • पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 
वापस स्टेशन की तरफ 


स्टेशन के बाहर सुधीर उपाध्याय 


पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 




पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 



पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 



ट्रेन की प्रतीक्षा में आचार्य विष्णु जी 
  • अमरकंटक यात्रा के अन्य यादगार फोटू 
बाद स्टेशन 

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अमरकंटक पर ट्रैन से उतरने के बाद आचार्य जी 



अमरकंटक में एस बी आई बैंक 

अमरकंटक में एक बाजार 

श्री नर्मदा नदी 

अमरकंटक में नर्मदा स्नान 

अमरकण्टक में मेरे सहयात्री आचार्य विष्णु शरण भारद्वाज 

कर्ण मंदिर पर मौज लेते हुए 


मार्कण्डेय आश्रम प्रवेश द्वार 


गायत्री शक्तिपीठ 

भारत सेवाश्रम संघ, अमरकंटक 

कैमरे का प्रयोग करते हुए आचार्य जी 

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नर्मदा में स्नान करते हुए अमरकंटक के वानर 



अमरकंटक यात्रा 

अमरकंटक बाजार 

एक बड़ा स्कूल 




गुरूद्वारे से प्रस्थान की तैयारी में आचार्य जी 


आपके फिर आगमन की प्रतीक्षा में 

अमरकंटक बस स्टैंड 

नर्मदा मंदिर में बनाया गया एक वीडिओ 










धन्यवाद 








































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