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Tuesday, April 14, 2020

AURANGABAD TO SHIRDI


औरंगाबाद से शिरडी रेल यात्रा 




5 - 6 जनवरी 2020                                                             इस यात्रा को शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये। 

    श्री घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद ऑटो वाले भाई ने हमें शाम को औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया। अब हमारी यात्रा की अगली मंजिल शिरडी की तरफ थी जिसके लिए हमारा रिजर्वेशन औरंगाबाद पर रात को ढाई बजे आने वाली पैसेंजर ट्रेन में था जो सुबह 6 बजे के करीब हमें शिरडी के नजदीकी रेलवे स्टेशन कोपरगाँव उतार देगी। 

    अभी ढ़ाई बजने में बहुत वक़्त था, इसलिए स्टेशन के क्लॉक रूम पर रखे अपने बैगों को लेकर हम वेटिंग रूम पहुंचे। औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का वेटिंग रूम बहुत ही शानदार और साफ़ सुथरा था, अधिकतर यात्री यहाँ बेंचों पर बैठकर अपनी अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे थे। हमने यहाँ एक कोने में अपनी दरी और चटाई बिछाकर अपना बिस्तर लगाया और थोड़ी देर के लिए हम यहाँ आराम करने लेट गए। 

Friday, May 31, 2019

Ujjaini Express Trip


केदारनाथ यात्रा 2019 - मथुरा से हरिद्वार रेल यात्रा 




   वक़्त बस गुजरता ही जा रहा था और मैं अभी भी हरिद्वार से ऊपर पहाड़ों में अपने आराध्यों के दर्शन करने नहीं जा पाया था। मेरे अन्य घुमक्क्ड़ साथियों ने उत्तराखंड का चप्पा चप्पा छान रखा था और मैं अभी सिर्फ हरिद्वार और ऋषिकेश तक ही सीमित था, कारण था कि मैं पहली बार वहां अकेला नहीं जा सकता था, मेरे साथ मेरी माँ अधिकांशतः मेरी सहयात्री रही हैं और उनके साथ मैंने 12 ज्योतिर्लिंग पूरे करने का प्रण लिया है जिसमे से दस ज्योतिर्लिंग हम कर चुके हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल और कठिन यात्रा जिस ज्योतिर्लिंग की मुझे लगती थी वो श्री बाबा केदारनाथ जी थे क्योंकि यहाँ अधिकतर पैदल और ऊँचाई सहित ट्रैकिंग है, जो मुझे माँ के लिए पर्याप्त नहीं लग रही थी किन्तु जब प्रण लिया है तो जाना तो पड़ेगा ही अगर बाबा नहीं भी बुलाएँगे तो भी हम जायेंगे। बस ऐसा ही सोचकर मैंने एक गलत महीना यात्रा के लिए निश्चित किया और ये महीना जून था। 

Friday, March 1, 2019

Nagbhir to Gondia



विदर्भ की यात्रायें 
नागभीड़ से गोंदिया पैसेंजर रेल यात्रा 

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    इतवारी से आई हुई नेरो गेज पैसेंजर का इंजिन आगे से हटाकर पीछे लगा दिया गया और यह वापस इतवारी  जाने के लिए तैयार थी। अब मैं यहाँ से बल्लारशाह से आने वाली ब्रॉड गेज की लाइन की पैसेंजर से गोंदिया तक  जाऊँगा, जो यहाँ साढे चार बजे आयेगी और अभी 2 बजे हैं, यानी पूरा ढाई घंटा है अभी मेरे पास। नागभीड स्टेशन शहर से दूर एकांत क्षेत्र में स्थित है यह किसी ज़माने में नेरो गेज लाइन का मुख्य जंक्शन स्टेशन था जहाँ से ट्रेन नागपुर, गोंदिया और राजोली तक जाती थी, बाद में इसे चंदा फोर्ट तक बढ़ा दिया गया। सन 1992  इसे चंदा फोर्ट से लेकर गोंदिया तक नेरो गेज से ब्रॉड गेज में बदल दिया गया परन्तु नागपुर से नागभीड रेल खंड आज भी नेरो गेज ही है। कुछ साल पहले नागपुर से इतवारी बीच नैरो गेज ट्रैक को ब्रॉड गेज में बदल दिया गया और नागपुर से नागभीड जाने वाली नैरो गेज की ट्रेनों का इतवारी से संचालन किया जाने लगा।

Nagpur & Nagbhir



मथुरा से नागपुर और नागभीड़  रेल यात्रा 

    आज मैं फिर से एक साल बाद अपनी दक्षिण यात्रा पर रवाना हुआ, इस बार मेरी यह यात्रा विदर्भ की ओर थी। महाराष्ट्र राज्य में नागपुर, चंद्रपुर, गोंदिया, अमरावती, यवतमाल और अकोला के आसपास का क्षेत्र भारत का विदर्भ प्रान्त कहलाता है और इसबार मेरी यात्रा लगभग इन्ही जिलों में पूरी होनी थी। इसबार मेरी यात्रा का उद्देश्य सिर्फ रेल यात्रा पर आधारित था, जैसा कि मैंने अपने पिछले लेख में नैरो गेज रेलवे लाइन्स का वर्णन किया था जिनमे तीन नैरो गेज लाइन ऐसी थीं जो आज भी महाराष्ट्र के विदर्भ प्रान्त में पूर्ण रूप से सुचारु हैं। मुझे इन्ही तीनों रेलवे लाइन पर यात्रा करनी है और यही मेरी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भी है। 

Monday, July 23, 2018

MT. ABU


आबू पर्वत की एक सैर



     महीना मानसून का चल रहा था और ऐसा शायद ही कभी हुआ हो कि मानसून आ चुका हो और हम यात्रा पर ना निकलें हों। जुलाई के इस पहले मानसून में मैंने राजस्थान के सबसे बड़े और ऊँचे पर्वत, आबू की सैर करने का मन बनाया। इस यात्रा में अपने सहयात्री के रूप में कुमार को फिर से अपने साथ लिया और आगरा से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन में दोनों तरफ से मतलब आने और जाने का टिकट भी बुक करा लिया। 23 जुलाई को कुमार आगरा फोर्ट से ट्रेन में बैठा और मैं अपनी बाइक लेकर भरतपुर पहुंचा और वहीँ से मैं भी इस ट्रेन में सवार हो लिया और हम दोनों आबू पर्वत की तरफ निकल पड़े।

Friday, March 23, 2018

Rewari Passenger



  फ़िरोज़पुर से भटिंडा व रेवाड़ी  पैसेंजर यात्रा 



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        हुसैनीवाला से वापस मैं फ़िरोज़पुर आ गया, यहाँ से भटिंडा जाने के लिए एक पैसेंजर तैयार खड़ी हुई थी जो जींद की तरफ जा रही थी परन्तु मैं भटिंडा से रेवाड़ी वाली लाइन यात्रा करना चाहता था इसलिए सीधे भटिंडा का टिकट लेकर ट्रेन में पहुंचा और खाली पड़ी सीट पर जाकर बैठ गया। शाम चार बजे तक भटिंडा पहुँच गया परन्तु चार से पांच बज गए इस ट्रेन को भटिंडा के प्लेटफॉर्म पर पहुँचने में। तभी दुसरे प्लेटफॉर्म पर खड़ी रेवाड़ी पैसेंजर ने अपना हॉर्न बजा दिया, मैं जींद वाली पैसेंजर से उतरकर लाइन पार करके रेवाड़ी पैसेंजर तक पहुंचा , ट्रेन तब तक रेंगने लगी थी, इस ट्रेन में बड़ी जबरदस्त मात्रा में भीड़ थी जबकि ये भटिंडा से ही बनकर चलती है।

Tuesday, October 24, 2017

MAGADH EXPRESS : ISLAMPUR


मगध एक्सप्रेस -  इस्लामपुर से नईदिल्ली 

इस्लामपुर रेलवे स्टेशन 
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       राजगीर से दोपहर दो बजे दानापुर इंटरसिटी चलती है, मुझे इसी ट्रेन से वापस पटना लौटना था क्योंकि मेरा रिजर्वेशन आज शाम को मगध एक्सप्रेस में था जो शाम को साढ़े छः बजे पटना से रवाना होगी। मैं सही वक़्त पर राजगीर स्टेशन पहुँच गया और मेरे आते ही ट्रेन भी चल पड़ी, मुझे इस सफर में बस यही अफ़सोस रहा कि मैं नालंदा का विश्व विध्यालय नहीं देख पाया जिसे मोहम्मद गौरी के सेनापति बख़्तियार ख़िलजी ने नष्ट कर दिया था, परन्तु कोई बात नहीं नालंदा अभी मेरी यात्राओं की लिस्ट में शामिल रहेगा। 

     एक शानदार ऐतिहासिक धरती पर सफर करने और यहाँ के नज़ारे मुझे दुबारा यहाँ आने पर आकर्षित कर रहे थे। बख्तियारपुर पहुंचकर मुझे लगने लगा था कि कहीं मगध एक्सप्रेस छूट न जाए पर मैं गलत था पटना स्टेशन पहुँचने पर पता चला कि मगध तो अभी दिल्ली से आई है पहले ये इस्लामपुर जायेगी और वहां से वापस आयेगी तब दिल्ली की ओर जायेगी। फिर भी मैं अपनी उसी सीट पर जाकर बैठ गया जो मेरी पटना से दिल्ली तक बुक थी। 

     रात होते होते ट्रेन इस्लामपुर पहुंची, यह पटना से आगे एक छोटा और आखिरी स्टेशन है, मगध एक्सप्रेस पहले पटना तक ही चलती थी पर अत्यधिक ट्रैफिक हो जाने की वजह से रेलवे ने इसे इस्लामपुर तक कर दिया, नॉर्थन रेलवे की यह ट्रेन नईदिल्ली से आकर वापस नईदिल्ली चली जाती है। पटना से इस्लामपुर तक यह ट्रेन  लगभग पूरी खाली ही जाती है। मुझे इस सफर के दौरान इस्लामपुर तक कोई भी TTE टिकट पूछने नहीं आया। मैं फिर से राजगीर के पास ही था। इस्लामपुर से रात ग्यारह बजे ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना हुई और मैं मजे से अपनी सीट पर सो गया। 

     सुबह जब आँख खुली तो देखा मैं उत्तर प्रदेश में हूँ मिर्ज़ापुर आने वाला है। मुझे लगा था मैं दोपहर तक पहुँच जाऊँगा यह ट्रेन अपने समय काफी लेट चल रही थी। शाम होते होते मैं टूंडला पहुंचा, मुझे मथुरा जाना था और यह अलीगढ होते हुए सीधे दिल्ली जाएगी, इसलिए मैं टूंडला ही उतर गया और पीछे आ रही तूफ़ान एक्सप्रेस से रात को बारह बजे मथुरा पहुंचा। स्टेशन के बारे मेरे दो भाई दिनेश और विनीत मुझे यहाँ मिले और हम तीनों ही घर की तरफ रवाना हो गए। पीछे से आते महेंद्र मामाजी अपनी बाइक पर हम तीनों को घर ले आये। 

                                   

इस्लामपुर जाते हुए सुधीर उपाध्याय 

एकंगरसराय रेलवे स्टेशन 

इस्लामपुर रेलवे स्टेशन 


इस्लामपुर रेलवे स्टेशन और सुधीर उपाध्याय 


बिहार यात्रा की अन्य यात्रायें : -

यात्रा क्र. यात्रा विवरण  यात्रा दिनाँक यात्रा विशेष 
20 अक्टूबर 2017 
बिहार का ऐतिहासिक महत्त्व 
21 अक्टूबर 2017 
आगरा कोलकाता एक्सप्रेस 
22 अक्टूबर 2017 
सासाराम में शक्तिपीठ 
22 अक्टूबर 2017 
एक महान शासक की समाधी 
22 अक्टूबर 2017 
डेहरी से रोहतास 
23 अक्टूबर 2017 
गया, पटना और राजगीर 
23 अक्टूबर 2017 
प्राचीन मगध की राजधानी 
अजातशत्रु का किला 23 अक्टूबर 2017 मगध का प्राचीन किला 
ब्रह्मकुंड - गर्म पानी का कुंड 23 अक्टूबर 2017 गंधक युक्त औषधीय जल 
10 वैभारगिरि पर्वत और सप्तपर्णी गुफा 23 अक्टूबर 2017 प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन 
11 जरासंध और जरादेवी मंदिर 23 अक्टूबर 2017 महाभारत कालीन मगध सम्राट 
12 मनियार मठ 23 अक्टूबर 2017 एक बौद्ध कालीन कूप 
13 सोनभंडार या स्वर्ण भंडार गुफा 23 अक्टूबर 2017 बिम्बिसार का खजाना 
14 बिम्बिसार की जेल और जीवक का दवाखाना 23 अक्टूबर 2017 मगध के प्राचीन स्थल 
15 विश्व शांति स्तूप - राजगीर 23 अक्टूबर 2017 गिद्धकूट पर्वत पर बौद्ध स्थल  

Tuesday, August 15, 2017

KACHEGUDA PASSENGER



आंध्र प्रदेश में एक सैर - काचेगुड़ा पैसेंजर यात्रा 




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        श्रीशैलम में जिओ का नेटवर्क न होने की वजह से मुझे अपना आगे का सफर तय करना मुश्किल हो गया और मैंने अपने लिए गलत राह चुन ली। ये गलत राह थी श्रीशैलम बस स्टैंड से हैदराबाद की टिकट न लेकर मार्का पुर की टिकट ले लेना। सुबह चार बजे हमारी बस श्रीशैलम से मार्कापुर की तरफ निकल पड़ी। सुबह सात बजे जब मैं मार्कापुर पहुँचा, तो यहाँ जिओ के नेटवर्क थे। मैंने रेलवे के ऍप्स पर देखा तो पता चला मार्का पुर से हैदराबाद के लिए एक ही पैसेंजर ट्रैन थी जो रात ग्यारह बजे हमें काचेगुड़ा उतार रही थी। यानी कि हैदराबाद की विजिट कैंसिल होनी ही थी।

Friday, August 11, 2017

Kerla Express: Tirupati




केरला एक्सप्रेस  - मथुरा से तिरुपति



         केरला एक्सप्रेस जैसी ट्रेन में कन्फर्म सीट पाने के लिए रिजर्वेशन कई महीने पहले ही कराना होता है और ऐसा ही मैंने भी किया। इसबार मानसून की यात्रा का विचार साउथ की तरफ जाने का था, मतलब तिरुपति बालाजी। चेन्नई के पास ही हैं लगभग थोड़ा बहुत ही फर्क है, उत्तर से दक्षिण जाने में जो समय चेन्नई के लिए लगता है वही समय तिरुपति जाने के लिए भी लगता है। इसके लिए जरुरी है कि अगर आप ट्रेन से जा रहे है तो आपकी टिकट कन्फर्म हो। मैंने अप्रैल में ही रिजर्वेशन करवा लिया था और मुझे तीनो सीट कन्फर्म मिली। अब इंतज़ार यात्रा की तारीख आने का था और जब यह तारीख आई तो एक सीट मैंने कैंसिल करदी। अब मैं और माँ ही इस सफर के मुसाफिर थे।

Monday, March 23, 2015

पिताजी के साथ दुर्ग की एक रेल यात्रा

 पिताजी के साथ दुर्ग की एक रेल यात्रा 




   मेरे पिताजी अभी छ महीने पहले ही अपनी रेल सेवा से सेवानिवृत हुए हैं परन्तु उनका स्वास्थ्य अब उनका साथ नहीं दे रहा था। मधुमेह की बीमारी ने उनके पूरे शरीर पर पूरा प्रभाव रखा हुआ था जिस वजह से वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चले थे। हजारों डॉक्टरों की दवाइयों से भी जब उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ तो किसी ने मुझे सलाह दी कि आप इन्हें दुर्ग ले जाओ, वहां एक शेख साहब हैं जो मधुमेह के रोगियों को एक काढ़ा बनाकर पिलाते हैं और ईश्वर चाहा तो वह जल्द ही इस बीमारी से सही हो जायेंगे। मुझे मेरे पिताजी के स्वस्थ  होने की एक आस सी दिखाई देने लगी। 

   मैंने दुर्ग जाने की तैयारी शुरू कर दी। मथुरा से दुर्ग के लिए मैंने गोंडवाना एक्सप्रेस में रिजर्वेशन कराया और मैं पिताजी को लेकर दुर्ग की तरफ रवाना हो गया। अगले दिन शाम तक मैं और पिताजी दुर्ग पहुँच चुके थे। पिताजी किसी होटल या लॉज में रुकने के इच्छुक नहीं थे क्योंकि वह पैदल चलने में असमर्थ थे इसलिए मैंने प्लेटफॉर्म पर ही अपना और पिताजी का चटाई बिछाकर बिस्तर बनाया और पिताजी को वहीँ बैठा दिया और बाद में मैंने दुर्ग स्टेशन पर ही डोरमेट्री बुक की और दो बिस्तर हमें सोने के लिए मिल गए। मैं स्टेशन से बाहर आकर दुर्ग के बाजार गया और शेख साहब के पते पर पहुँचा। वहाँ पहुँचकर मुझे पता चला कि शेख साहब दवा को सुबह मरीजों को पिलायेंगे। यहाँ और भी मरीज थे जो काफी दूर दूर से यहाँ शेख साहब दवा पीने के लिए आये हुए थे। यहाँ इसीप्रकार प्रतिदिन मरीज आते हैं और दवा पीते हैं। 

   मरीजों के यहाँ आने की वजह से यहाँ रात में रुकने के लिए यहाँ कुछ कमरे भी किराये पर दिए जाते हैं परन्तु मैं इन कमरों म रुकना नहीं चाहता था इसलिए यह मेरे किसी काम के नहीं थे। अपनी मंजिल का पता करने के बाद मैं वापस स्टेशन की तरफ चल दिया। दुर्ग छत्तीसगढ़ का एक मुख्य शहर है, यहाँ स्थित भिलाई इस्पात प्लांट देश का बहुत बड़ा प्लांट है जिसे देखने के लिए काफी पर्यटक यहाँ आते हैं। मैं इसवक्त एक मुसाफिर था पर्यटक नहीं इसलिए मैं इसे फिर कभी देखने की इच्छा लिए स्टेशन की तरफ चलता जा रहा था। रास्ते में एक हनुमान जी का काफी शानदार मंदिर भी मुझे देखने को मिला। मैंने हनुमानजी को विधिवत प्रणाम किया और पिताजी के स्वस्थ होने की कामना की। 

   मैं वापस पिताजी के पास स्टेशन लौटा और पिताजी के खाना लेकर आया। मैं और पिताजी खाना खाकर  प्लेटफॉर्म पर ही सो गए। हमारे मथुरा को जाने वाली समता एक्सप्रेस भी प्लेटफार्म पर आ चुकी थी किन्तु हमें तो अगले दिन वापस जाना था। सुबह सबेरे मैं पिताजी को लेकर शेख साहब की मस्जिद पर पहुँचा और अन्य मरीजों के साथ पिताजी को दवा का सेवन कराया गया। दवा का सेवन करने के पश्चात मैं और पिताजी स्टेशन  पहुँचे। यहाँ दुर्ग से बनकर चलने वाली जम्मूतवी एक्सप्रेस खड़ी हुई थी जिसके जनरल कोच एकदम खाली पड़े हुए थे। मैंने अपना रिजर्वेशन का टिकट कैंसिल कराया और हमने जनरल कोच में ही अपनी यात्रा प्राम्भ की। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर निकलने के बाद उसलापुर से इस कोच में अत्यधिक भीड़ चढ़ गई। यह लोग छत्तीसगढ़ी लोग थे जो बिलासपुर के बाईपास स्टेशन उसलापुर पर इस ट्रेन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे। 

 जैसे तैसे मैंने और पिताजी ने इस ट्रेन में यात्रा की। गर मुझे इस भीड़ के आने का पहले से एहसास होता तो मैं कभी अपनी कन्फर्म रिजर्वेशन टिकट को कैंसिल नहीं कराता। हमने झाँसी पहुँचकर इस ट्रेन को छोड़ दिया क्योंकि यह वैसे भी मथुरा नहीं रूकती और इसे हमें आगरा में छोड़ना पड़ता। झाँसी पर गोंडवाना एक्सप्रेस तैयार खड़ी हुई थी इसी के रिजर्वेशन कोच में खाली पड़ी सीटों पर हमने अपना आसन जमाया और सोते सोते सुबह मथुरा पहुँच गए।  

दुर्ग पर सुधीर उपाध्याय 

पिताजी और दुर्ग रेलवे स्टेशन 

कोच में पिताजी सोते हुए 


निपनिया रेलवे स्टेशन 

छत्तीसगढ़ के गांव 

कलमीटार रेलवे स्टेशन 

कलमीटार रेलवे स्टेशन 


भनवारटंक रेलवे स्टेशन 



दुर्ग - जम्मूतवी एक्सप्रेस 

पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन 

इस यात्रा की थम्सअप 

कटनी का बाईपास स्टेशन - कटनी मुरवारा 





Saturday, September 7, 2013

अजमेर - जोधपुर पैसेंजर यात्रा



अजमेर - जोधपुर  पैसेंजर यात्रा

AJMER - JODHPUR PASSENGER


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    अजमेर से दोपहर दो बजे जोधपुर के लिए एक पैसेंजर चलती है जो मारवाड़ होते हुए शाम को जोधपुर पहुँच जाती है। इस पैसेंजर ट्रेन में रिजर्वेशन की सुविधा भी उपलब्ध है। मैंने आगरा में ही इस ट्रेन में अपना रिजर्वेशन करवा लिया था। दोपहर दो बजे तक मैं अजमेर स्टेशन पर था और ट्रेन भी अपने सही समय पर स्टेशन से चलने की तैयार खड़ी हुई थी। इसी बीच रानीखेत एक्सप्रेस भी आ चुकी थी। गर मेरा इस पैसेंजर में रिजर्वेशन न होता तो शायद मैं इसी ट्रेन से जोधपुर जाता।

Tuesday, June 18, 2013

पठानकोट की तरफ




   पठानकोट की तरफ 

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     समता एक्सप्रेस के आने से पांच मिनट पहले ही हम स्टेशन पहुँच गए थे, आज ट्रेन अपने निर्धारित समय से पहले ही आ गयी थी, हमने अपनी सीट पर अपना स्थान ग्रहण किया और चल दिए निजामुद्दीन की ओर। मुझे इस यात्रा मैं कल्पना को अपने साथ ना लाने का बड़ा ही दुःख रहा, हम निजामुद्दीन पहुंचे, समता एक्सप्रेस की सेवा यहाँ समाप्त हो गयी। यहाँ से हमें एक लोकल मिली जो शकूरबस्ती जा रही थी , हम इसी लोकल में चढ़ लिए,यह प्रगति मैदान पर आकर खड़ी हो गयी, वैसे यहाँ बहुत ही कम ट्रेनों का स्टॉप है और ये सभी ट्रेन लोकल ही कहलाती हैं। कांगड़ा 

Friday, June 14, 2013

एटा पैसेंजर से एक यात्रा



एटा यात्रा 

   यूँ तो एटा आगरा के नजदीक ही है, दोनों में केवल 85 किमी का ही फासला है परन्तु मेरा एटा जाने का जब भी विचार बनता तो कोई न कोई अड़चन आ ही जाती थी और एटा जाने का विचार आगे के लिए खिसक जाता था एटा के लिए रास्ता टूंडला होकर गया है, और टूंडला से ही एक रेलवे लाइन बरहन होकर एटा के लिए गई है , जिस पर दिन में एक ही पैसेंजर ट्रेन चलती है जो टूंडला से एटा के २ चक्कर लगाती है, मेरा इस रेलवे लाइन को देखने का बड़ा ही मन था, पर कभी मौका नहीं मिल पाया । 

Tuesday, October 11, 2011

ईदगाह से बाँदीकुई डीएमयू यात्रा


ईदगाह से बाँदीकुई डीएमयू यात्रा 

आज मैं घर पर फ्री था, कोई काम नहीं था तो स्टेशन की तरफ निकल गया। आज आगरा कैंट ना जाकर सीधे ईदगाह स्टेशन गया, यहाँ अभी कुछ दिन पहले जापानी ट्रेन जैसी दिखने वाली एक डीएमयू शुरू हुई है जो अब बाँदीकुई तक जाने लगी है। यह बांदीकुई जाती है और फिर वहां से वापस आगरा आ जाती है। अपना किराया तो  लगता ही नहीं है इसलिए चल दिए इसी ट्रैन से एक यात्रा बाँदीकुई की और करने।  काफी समय पहले में इस लाइन पर भरतपुर तक यात्रा कर चूका हूँ तब यह लाइन मीटर गेज हुआ करती थी। गेज परिवर्तन के बाद यह मेरा पहला मौका है जब मैं इस ट्रैक पर यात्रा कर रहा हूँ।  मैं ईदगाह स्टेशन पहुंचा, कुछ देर में ट्रेन भी पहुँच गई। ट्रैन में अपना स्थान ग्रहण कर मैं यात्रा पर रवाना हो चला। 

ईदगाह के बाद बिचपुरी, रायभा निकलने के अछनेरा स्टेशन आता है। यह उत्तर प्रदेश और राजस्थान का सीमा केंद्र है और साथ ही किसी ज़माने में मीटरगेज का मुख्य जंक्शन पॉइंट था। यहाँ से एक लाइन मथुरा, हाथरस होते हुए कुमांयु और पूर्वोत्तर की तरफ चली जाती है और दूसरी लाइन हमें सीधे राजस्थान में प्रवेश कराती है। 
फ़िलहाल हम राजस्थान में प्रवेश करेंगे। राजस्थान एक बहुत बड़ा राज्य है जिसका प्रवेश द्वार भरतपुर कहलाता है और इसका एक आखिरी जिला जैसलमेर भी है जो अभी यहाँ बहुत दूर है। अछनेरा से निकलने के बाद ट्रैन  भरतपुर जिले में प्रवेश करती है जिसका पहला राजस्थानी रेलवे स्टेशन चिकसाना है, इसके बाद इकरन, नोह् बछामदी और फिर भरतपुर। भरतपुर से ठीक पहले उत्तर मध्य रेलवे की सीमा समाप्त हो जाती है क्योंकि भरतपुर पश्चिम मध्य रेलवे का मुख्य जंक्शन पॉइंट है जो दिल्ली से बांद्रा वाली मुख्य लाइन पर स्थित है। भरतपुर से निकलने के बाद अपने उत्तर मध्य रेलवे की सीमा फिर से शुरू हो जाती है जो बांदीकुई तक बनी रहती है। 

भरतपुर के बाद हेलक, पपरेला, नदबई, खेड़ली, घोसराना, मंडावर महुआ रोड, भूडा, करणपुरा, भजेरा, बिवाई, श्री घासी नगर और फिर उसके बाद बांदीकुई जंक्शन। बांदीकुई पर दिल्ली से रेवाड़ी, अलवर से होकर आने वाली रेलवे लाइन मिलती है जो जयपुर और उससे आगे तक जाती है।  इसके बाद उत्तर मध्य रेलवे की सीमा समाप्त हो जाती है और उत्तर पश्चिम रेलवे की सीमा शुरू हो जाती है जो फिर पूरे राजस्थान में बनी रहती है।   
मैं स्टेशन के बाहर निकला बड़ी से राजस्थानी कचौड़ी खाकर वापस अपनी ट्रेन में आकर बैठ गया। थोड़ी देर रुकने के बाद ट्रेन  वापस आगरा की ओर प्रस्थान कर जाती है और इस तरह मेरी एक बेफिजूल की यात्रा सम्पन्न होती है। 


ईदगाह आगरा जंक्शन 

ईदगाह आगरा जंक्शन

चिकसाना रेलवे स्टेशन 

पपरेरा रेलवे स्टेशन 



नदबई रेलवे स्टेशन 

तालछेरा बरौलीरान रेलवे स्टेशन 

खेड़ली रेलवे स्टेशन 

दांतिया रेलवे स्टेशन

घोसराना रेलवे स्टेशन 

मंडावर महुआ रोड रेलवे स्टेशन 

भूड़ा रेलवे स्टेशन 

करणपुरा रेलवे स्टेशन 

भजेरा रेलवे स्टेशन 

बिवाई रेलवे स्टेशन 

श्री घासीनगर रेलवे स्टेशन 

बाँदीकुई रेलवे स्टेशन और अपनी डीएमयू , बराबर में बरेली पैसेंजर भी खड़ी है जिसका एक भाग चंदौसी से बरेली की तरफ तथा दूसरा ऋषिकेश जाता है। 

बांदीकुई जंक्शन 

बाय बाय बांदीकुई 
धन्यवाद 

CHANDERI PART - 3

चंदेरी - एक ऐतिहासिक शहर,  भाग - 3 यात्रा को शुरू से ज़ारी करने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये ।     अब हम चंदेरी शहर से बाहर आ चुके...